वाराणसी (मानवीय सोच) काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी प्रकरण में नया विवाद आ गया है। इससे हड़कंप है। अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने विगत दिनों कंट्रोल रूम वाली जिस भूमि का विनिमय विश्वनाथ धाम के साथ किया था, उसके अनुबंध (एग्रीमेंट) पत्र की चौहद्दी में काशी विश्वनाथ मंदिर की सम्पत्ति दर्शायी गई है। उधर, अंजुमन की ओर से अदालत में दक्षिण-पश्चिम में मस्जिद बताकर मुकदमा भी लड़ा जा रहा है। एक ही जमीन को कहीं मंदिर तो कहीं मस्जिद बताने के बाद वादी अधिवक्ता अनुबंध पत्र को बतौर साक्ष्य कोर्ट में पेश करने की तैयारी में है।
क्या है पूरा मामला
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान ज्ञानवापी परिसर के उत्तरी पूर्वी छोर पर 158 वर्ग मीटर भूमि पर तीन मंजिला कंट्रोल रूम था। यह कंट्रोल रूम विशेष रूप से ज्ञानवापी की सुरक्षा के लिए ही बनाया गया था। उस भूमि का स्वामित्व भी सुन्नी सेंट्रल वफ्फ बोर्ड यानी मुस्लिम पक्ष के पास था।
कॉरिडोर के लिए इस जमीन की जरूरत महसूस हुई तो पिछले साल 10 जुलाई को मंदिर प्रशासन और अंजुमन इंतजामिया के बीच अनुबंध हुआ। इसमें कंट्रोल रूम की जमीन वफ्फ बोर्ड से खरीदने पर सहमति बनी। जमीन का मूल्यांकन 1.32 करोड़ रुपये तय हुआ। इतनी ही धनराशि की 92.93 वर्ग मीटर जमीन ज्ञानवापी से कुछ दूरी पर स्थित बांसफाटक में मुस्लिम पक्ष को देने पर सहमति बनी। इसके बाद जमीनों की अदला-बदली कर दी गई है।
कंट्रोल रूम वाली जिस जमीन को काशी विश्वनाथ मंदिर को दी गई उसके विनिमय अनुबंध (बिक्री पत्र) में लिखी गई चौहद्दी में विश्वनाथ मंदिर की सम्पत्ति दर्शाई गई है। अनुबंध पर मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा और अंजुमन की ओर से सचिव अब्दुल बातिन नोमानी की सहमति है। संयुक्त सचिव मो. यासीन की गवाही भी है। उधर अंजुमन की ओर से अदालत में सौंपे दस्तावेज में कंट्रोल रूम वाली जमीन के एक दिशा में मस्जिद दर्शाते हुए दावा भी किया गया है।
इसकी सुनवाई जारी है। इस सम्बंध में अंजुमन इंतजामिया के सचिव मो. यासीन का कहना है कि जमीन की चौहद्दी में मस्जिद नहीं आ रही है। वही, मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का कहना था कि अंजुमन के पदाधिकारियों की सहमति से अनुबंध तैयार किया गया।
