नई दिल्ली (मानवीय सोच) सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह मवेशियों के लंपी स्किन वायरस के मामले पर दर्ज हुई याचिका पर 31 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले को उठाया गया। मामले का उल्लेख करने वाले वकील ने यूयू ललित की पीठ को बताया कि यह बीमारी मवेशियों में फैल गई है और इसके कारण अब तक 67,000 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है।
इस पर न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति एस.आर. भट (S R Bhat) की पीठ ने कहा कि मामले को 31 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
जानवरों की हो रही मृत्यु
लंपी स्किन एक संक्रामक वायरल संक्रमण है, जो मवेशियों को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते मवेशियों में बुखार, त्वचा पर छोटी-छोटी गांठ बन जाती हैं। इसके चलते कई जानवरों की मृत्यु भी हो रही है। यह रोग मच्छरों, मक्खियों, जुंओं और ततैयों द्वारा मवेशियों के सीधे संपर्क में आने और दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैल रहा है।
केंद्र सरकार ने पिछले महीने कहा था कि जुलाई में लंपी स्किन के फैलने के बाद से 67,000 से अधिक जानवरों की मौत हो चुकी है। यह गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में फैल गया है।
विकसित किया गया एक स्वदेशी टीका
वहीं, 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि केंद्र और राज्य बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने की कोशिश में लगे हुए हैं। इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन वर्ल्ड डेयरी समिट (IDF WDS) 2022 का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि लंपी स्किन वायरस के लिए एक स्वदेशी टीका विकसित किया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
28 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम से उस याचिका पर जवाब मांगा था जिसमें मवेशियों में लंपी स्किन वायरस के मामलों से निपटने और स्थापित करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की एक टीम के गठन की मांग की गई थी। संक्रमित जानवरों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए जाने की भी मांग थी।
