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ऋतुजा लटके मामला: उद्धव ठाकरे गुट को HC से बड़ी राहत

मुंबई: (मानवीय सोच) अंधेरी विधानसभा चुनाव  में ठाकरे गुट की उम्मीदवार ऋतुजा लटके के इस्तीफे के संबंध में अहम फैसला दिया है। अदालत ने बीएमसी और ऋतुजा लटके के वकीलों की दलील सुनने के बाद अदालत ने बीएमसी को आदेश दिया है कि कल सुबह 11 बजे तक ऋतुजा लटके  को इस्तीफ़ा मंजूर करने पत्र दिया जाये। बता दें कि बीएमसी (BMC) प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार कराने के लिए उद्धव गुट की उम्मीदवार ऋतुजा लटके अदालत की शरण में गई थीं। ऋतुजा ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे  से मुलाकात की खबरों को भी निराधार बताया है। बुधवार को उद्ध‌व की पार्टी के नेताओं अनिल परब और विनायक राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि एकनाथ शिंदे गुट उनकी उम्मीदवार ऋतुजा लटके पर उनके चुनाव चिह्न ‘दो तलवार और ढाल’ पर उपचुनाव लड़ने का दबाव बना रहा है। उन्हें मंत्री पद का प्रलोभन दिया जा रहा है। परब ने दावा किया था कि बीएमसी द्वारा जानबूझकर ऋतुजा लटके का इस्तीफा मंजूर नहीं किया जा रहा है, ताकि उन पर शिंदे गुट से चुनाव लड़ने का दबाव बनाया जा सके। हालांकि उनके इस्तीफे की पूरी फाइल बीएमसी के पास है।

ऋतुजा लटके के वकील की दलील
ऋतुजा लटके के वकील एडवोकेट विश्वजीत सावंत ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि पहली बार बीते 2 सितंबर को रुतुजा लटके ने अपना इस्तीफा बीएमसी को सौंपा था। तकरीबन एक महीने के बाद 29 सितंबर को उन्हें यह बताया गया कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया है। इसी बीच 3 अक्टूबर को केंद्रीय चुनाव आयोग ने अंधेरी विधानसभा के उप चुनाव की घोषणा की। जिसके बाद ऋतुजा लटके ने दोबारा 3 अक्टूबर को अपना इस्तीफा सौंपा। इस बार भी उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने के लिए वह इस्तीफा दे रही हैं। बीएमसी में ऋतुजा लटके के खिलाफ न तो कोई इंक्वायरी पेंडिंग है और न ही किसी प्रकार का ड्यू उन्हें देना है। हालांकि बीएमसी के आदेश के बाद उन्होंने यह तमाम चीजें भी सौंपी। इसके बाद ऋतुजा लटके के लिए एक टैक्स इनवॉइस रिलीज किया गया ताकि अगर वो एक महीने का नोटिस पूरा न कर पाएं तो एक महीने की तनख्वाह भर सकें। यह टैक्स इनवॉयस 10 अक्टूबर 2022 को जारी किया गया।

क्या इसका यह मतलब समझा जाये कि ऋतुजा लटके का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया? ऋतुजा लटके ने बीएमसी द्वारा दिये गए इनवॉइस की रकम को भी भर दिया था। हैरत की बात यह है कि ऋतुजा बीएमसी में एक क्लर्क के पद पर काम करती हैं। उनका इस्तीफा बीएमसी कमिश्नर मंजूर नहीं कर रहे हैं। कायदे से उनका इस्तीफा कमिश्नर के पास तक जाना ही नहीं चाहिए था। लटके के वकील ने कहा कि यह एक ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के मामला है जिसे कमिश्नर स्वीकार कर सकते थे।

बीएमसी की दलील
बीएमसी के वकील एडवोकेट साखरे ने अदालत को बताया कि ऋतुजा लटके के खिलाफ एक शिकायत पेंडिंग है। दरअसल एक मामले में लटके के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत वाली एक विभागीय जांच पेंडिंग है। इसके अलावा घूस लेने का भी एक मामला पेंडिंग है। बीएमसी ने आरोप लगाया कि ऋतुजा लटके लाइजनिंग के काम में बिजी रहती थी। वह दफ्तर आकर कभी ठीक से काम नहीं करती थीं। इस मामले में अदालत ने बीएमसी के वकील से पूछा कि यह शिकायत कब दर्ज हुई है। जिस पर विश्वजीत उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर को हुई है।

इस पर ऐतराज जताते हुए लटके के वकील विश्वजीत सामंत ने कहा कि यह झूठी शिकायत है जो किसी और के आदेश पर दर्ज करवाई गई है। उन्होंने कहा कि अगर मैं चुनाव लड़ता हूं तब स्क्रूटनी के समय पर मेरे नॉमिनेशन को चुनौती दी जा सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मैं अपने पद का दुरुपयोग कर रही ह। यह एक सोची समझी साजिश है। बीएमसी के वकील एडवोकेट साखरे ने कहा कि महानगर पालिका के नियम के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी इस्तीफा देना चाहता है तो उसे एक महीने पहले लिखित में इस्तीफा देना होता है। अगर आप नोटिस देखेंगे तो पता चलेगा कि तत्काल रिलीज करने की बात कही गई है। यह अधिकार बीएमसी का है कि वो यह छूट देते हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि अभी भी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। इस फैसले को लेने में एक महीने का वक्त लगता है। जब तक उन्हें इस फैसले के बारे में बताया नहीं जाता तब तक कोई भी कर्मचारी महानगरपालिका का कर्मचारी है और उसे अपनी सेवाओं का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 3 अक्टूबर को भेजा गया स्थिति का नोटिस तकनीकी खामियां हैं। कर्मचारी ने ड्यूटी खत्म होने के बाद यह नोटिस भेजा है और यह चाहता है कि उसे स्वीकार कर लिया जाए। यह पूरी तरह से कमिश्नर के विवेक पर है कि वह इसे स्वीकार करते हैं या फिर अस्वीकार।

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