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मुरादाबाद में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सबसे बड़ा जाल, दूसरे नंबर पर बिजनौर

लखनऊ  (मानवीय सोच) मुरादाबाद जिले में अब तक सबसे ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले हैं। इसके लिए चल रहे सर्वे को और तेज करने को कहा गया है। इस सूची में दूसरे नंबर पर बिजनौर और तीसरे पर बस्ती जिला है। पूरे प्रदेश में कुल 6502 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं जिनमें 5200 में सर्वे भी पूरा कर लिया गया है। टॉप टेन जिलों में पांच पूर्वी और पांच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले हैं।

उत्तर प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को लेकर सर्वे चल रह है। यह सर्वे दस सितंबर से शुरू किया गया था। 15 अक्तूबर तक जिलों में टीमें द्वारा सर्वे पूरा करने और 25 अक्तूबर तक डीएम की टिप्पणी के साथ रिपोर्ट शासन को भेजने को कहा गया था। अब इस सर्वे की तारीख और बढ़ा दी गई। कहा गया कि अब टीमें बीस अक्तूबर तक सर्वे कर अपनी रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के माध्यम से  31 अक्तूबर 2022 तक जिलाधिकारियों को भेजेंगे। डीएम 15 नवंबर तक शासन को रिपोर्ट प्रेषित कर देंगे। अब तक का जो सर्वे हुआ हैं उसमें सबसे ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मुरादाबाद में मिले हैं। यहां कुल 585 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। दूसरे पर बिजनौर है। यहां 450 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। तीसरे स्थान पर बस्ती में 401 मदरसे ऐसे मिले हैं जिनकी मान्यता नहीं है।

समिति कर रही रोज मॉनीटरिंग
मदरसा सर्वे पर तीन सदस्यीय समिति अब रोज मॉनीटिरिंग कर रही है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह केनिर्देश पर विशेष सचिव अल्पसंख्यक, निदेशक अल्पसंख्यक तथा रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड की कमेटी का गठन किया गया है। यह समिति रोज का लेखा जोखा भी तैयार करेगी कि आज टीमों ने क्या किया।? साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सभी बिंदुओं पर जांच होनी है। मदरसों का कहां से फंड आ रहा है इसका एक मुख्य बिंदु यह भी है।
गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के टॉप टेन जिले
मुरादाबाद – 585
बिजनौर – 450
बस्ती – 401
गोंडा – 281
देवरिया – 270
सहारनपुर- 258
शामली -244
संत कबीरनगर- 240
मुजफ्फरनगर- 222
सिद्घार्थनगर – 185
सर्वे की तारीख अब और बढ़ा दी गई है। सभी टीमें काम कर रही हैं। सभी बिंदुओं पर विस्तार से मदरसों का सर्वे किया जा रहा है। अभी तक लगभग साढ़े छह हजार मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। सर्वे पूरा होने पर सारी तस्वीर साफ हो जाएगी 

अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को गुणवत्तायुक्त एवं बेहतर शिक्षा मिल सके, इसलिए यह सर्वे कराया जा रहा है। उनका सर्वांगीण विकास कराना सरकार की प्राथमिकता है। इन बच्चों को भी शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा। 

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