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सदस्यों की नियुक्ति संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा 31 अक्टूबर को सुनवाई

नई दिल्‍ली :  (मानवीय सोच)   विधि आयोग को ‘वैधानिक निकाय’ घोषित करने और इसके अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति का केंद्र को निर्देश देने संबंधी एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 31 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई 31 अक्टूबर की वाद सूची के अनुसार, याचिका की सुनवाई सीजेआई उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ करने वाली है. दिसंबर 2021 में दायर जनहित याचिका के जवाब में विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा कहा गया कि विधि आयोग को वैधानिक निकाय बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा था, ‘यह कहा गया है कि 22वें विधि आयोग का गठन 21 फरवरी, 2020 को किया गया था और अध्यक्ष एवं इसके सदस्यों की नियुक्ति संबंधित अधिकारियों के पास विचाराधीन है. हालांकि, विधि आयोग को एक वैधानिक निकाय बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.’

मंत्रालय की दलील थी कि अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका निरर्थक है और इसमें दम नहीं होने के कारण इसे सुनवाई के लिए बनाये रखने की आवश्यकता नहीं है.जनहित याचिका में गृह मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ भारत के विधि आयोग को भी पक्षकार बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि वाद-हेतुक 31 अगस्त, 2018 को उस वक्त सामने आया, जब 21 वें विधि आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन केंद्र ने न तो आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया है और न ही 22वें विधि आयोग के लिए अधिसूचना जारी की है.

उपाध्याय ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा है, ‘हालांकि 19 फरवरी, 2020 को केंद्र ने 22वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दी थी, लेकिन उसने आज तक न तो अध्यक्ष की, न ही अन्य सदस्यों की नियुक्ति की है.’ याचिका में शीर्ष अदालत से खुद भी जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है.

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