लखनऊ (मानवीय सोच) उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन से दवा आपूर्ति का ठेका लेने वाली कंपनियां दवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं। ऐसे में अस्पतालों में दवाओं की कमी बनी हुई है। कारपोरेशन एक के बाद एक दवा कंपनी को डिबार कर रहा है। सप्ताहभर में दो कंपनियों को डिबार किया जा चुका है।
प्रदेश में दवाओं की मांग के आधार पर कारपोरेशन टेंडर जारी करता है। अलग- अलग कंपनियां इसमें हिस्सा लेती हैं। कम दर पर गुणवत्तापरक दवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी को आपूर्ति की जिम्मेदारी दी जाती है। तत्कालिक तौर पर कंपनियां जिम्मेदारी ले लेती हैं लेकिन कुछ समय बाद वे दवाओं की आपूर्ति से कतराने लगती हैं। ऐसे में अस्पताल में दवाओं की कमी हो जा रही है।
ऐसे मामलों को देखते हुए कारपोरेशन प्रबंधन ने दवा आपूर्ति कंपनियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सप्ताहभर में दो कंपनियों को डिबार किया गया है। दो नवंबर को मधुमेह के मरीजों को दी जाने वाली मेटफार्मिन हाइड्रोक्लोराइड 500 एमजी टैबलेट आपूर्ति न करने पर एएनजी लाइफ साइंसेज इंडिया नामक कंपनी को बैन किया था।
अब दर्द निवारक डाइक्लोफिनेक सोडियम इंजेक्शन की आपूर्ति करने वाली एरियान केयर को डिबार किया गया है। इस कंपनी ने तीन अक्तूबर 2020 से दो अक्तूबर 2022 तक के लिए दवा आपूर्ति करने की जिम्मेदारी ली थी लेकिन छह दिसंबर 2021, 16 मार्च 2022 और 13 जून 2022 को आर्डर देने के बाद भी इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं की गई। ऐसे में कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ने कंपनी को दो साल के लिए डिबार कर दिया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
यूपीएमएससीएल कंपनी के प्रबंध निदेशक मुथु कुमार स्वामी का कहना है कि दवाओं की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त की जा रही है। जिम्मेदारी लेकर दवा आपूर्ति नहीं करने वाली कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
