लखनऊ से मेयर का चुनाव लड़ने के लिए नेताओं ने झोंकी ताकत

लखनऊ:  (मानवीय सोच)   उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। बस तारीखों का एलान होना बाकी रह गया है। चुनाव को जहां एक ओर उम्मीदवार अपनी सियासी नैया पार लगाने के लिये पार्टी दफ्तर से लेकर नेताओं के आवास तक परिक्रमा लगा रहे है, वहीं टिकट बंटवारे को लेकर सभी सियासी पार्टियों में मंथन चल रहा है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में मेयर की सीट महिला रहने की स्थिति में यहां टिकट को लेकर संघर्ष देखने को मिल सकता है, क्योंकि मेयर टिकट की दावेदारी में विधायक से लेकर उपमुख्यमंत्री तक ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। फिलहाल लखनऊ में बीजेपी महिला नेत्री के रूप में संयुक्ता भाटिया मौजूदा मेयर हैं।

डिप्टी सीएम से लेकर विधायक तक ने झोंकी ताकत
राजधानी में पार्षदी और मेयर चुनाव को लेकर हर गली मोहल्ले और नुक्कड़ पर इन दिनों सिर्फ और सिर्फ चुनावी चर्चा चल रही है। वहीं इन चर्चाओं के दौर में एक चर्चा ये भी जोरों पर है कि मौजूदा उपमुख्यमंत्री से लेकर पूर्व डिप्टी सीएम तक अपनी-अपनी पत्नियों को मेयर का चुनाव लड़ना चाहते है। इसको लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एड़ी चोटी का जोर लगा रखे हैं। दूसरी पार्टी से आए लखनऊ से दो बार के बीजेपी विधायक भी अपनी धर्मपत्नी को चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं, तो वहीं मौजूदा मेयर साहिबा भी अपनी बहू को टिकट दिलाना चाहती है। उधर, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव भी इस रेस में पीछे नहीं है। लखनऊ से मेयर पद के लिये बीजेपी से उनका दावा भी मजबूत माना जा रहा है।

सपा महंत दिव्या गिरी को बना सकती है प्रत्याशी
आरक्षण के बाद अगर लखनऊ मेयर सीट महिला रहती है तो इस स्थिति में समाजवादी पार्टी भी पूर्व प्रत्याशी मीरा वर्धन को दोबारा उम्मीदवार बना सकती है। इस रेस में पूर्व एमएलसी कांति सिंह का नाम भी चर्चाओं में चल रहा है। डालीगंज स्थित महादेव मनकामेश्वर मंदिर की पीठासीन महिला महंत दिव्या गिरी को भी सपा अपना प्रत्याशी बनाया सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी महंत दिव्या गिरी को उसी स्थिति में उम्मीदवार बनाएगी जब मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में होंगी। इसी क्रम में बाबू बनारसी दास यूनिवर्सिटी के फाउंडर और पूर्व मेयर रहे अखिलेश दास गुप्ता की पत्नी अल्का दास गुप्ता भी मेयर चुनाव में हाथ आजमाती नजर आ सकती है। बीजेपी और सपा उनकी प्राथमिकता में है।

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