मैनपुरी (मानवीय सोच) मुलायम सिंह यादव के दाहिने हाथ कहे जाने वाले शिवपाल सिंह यादव नर्म हुए तो मैनपुरी की सियासत ने फिर करवट बदल ली। अब तक विपक्षी जहां चाचा शिवपाल सिंह को डिंपल की राह का रोड़ा मानते हुए जीत का गणित समझा रहे थे, अब उनके लिए ये बड़ा झटका है। शिवपाल ने साफ कर दिया है कि वे मुलायम की कर्मभूमि में साइकिल को और रफ्तार देने का काम करेंगे।
मुलायम सिंह यादव के सामने ही सैफई परिवार दो फाड़ हो गया था। एक तरफ जहां मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव और उनका परिवार था तो वहीं दूसरी तरफ मुलायम सिंह के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनका परिवार था। चाचा-भतीजे के बीच रिश्तों में आई तल्खी से सियासत का गणित भी बदलना शुरू हो गया।
तल्खी से फिरोजाबाद उपचुनाव में मिली थी हार
इसी तल्खी की कीमत सपा ने 2019 के लोकसभा उपचुनाव में फिरोजाबाद सीट खोकर चुकाई थी। दरअसल यहां सपा प्रत्याशी और प्रोफेसेर रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव के सामने शिवपाल यादव ने लोकसभा चुनाव में ताल ठोंकी थी। नतीजे आए तो दोनों को शिकस्त मिली और भाजपा ने जीत दर्ज की।
