(मानवीय सोच) सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन जासूसी मामले में वैज्ञानिक नंबी नारायणन को कथित रूप से फंसाने के एक मामले में एक पूर्व डीजीपी सहित 4 व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देने के केरल हाईकोर्ट के आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया.
मुद्दे पर 4 सप्ताह के भीतर फैसला करने का निर्देश
न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने मामले को हाई कोर्ट को वापस भेज दिया और उसे इस मुद्दे पर चार सप्ताह के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया. पीठ ने कहा कि ये सभी अपीलें स्वीकार की जाती हैं. हाई कोर्ट द्वारा पारित अग्रिम जमानत देने के आदेश को रद्द किया जाता है. सभी मामलों को हाई कोर्ट को वापस भेजा जाता है ताकि वह उनके गुणदोष के आधार पर नए सिरे से फैसला कर सके. अदालत ने किसी भी पक्ष के लिए गुणदोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है
हाई कोर्ट को पारित करना है आदेश
पीठ ने कहा कि अंतत: हाई कोर्ट को आदेश पारित करना है. हम कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह इस आदेश की तारीख से 4 सप्ताह के भीतर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला करे. सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को आज से एक सप्ताह के भीतर संबंधित पीठ के समक्ष जमानत याचिकाओं को अधिसूचित करने का निर्देश दिया.
जानिए किनसे जुड़ा है मामला
शीर्ष अदालत ने कहा कि तब तक एक अंतरिम व्यवस्था के तहत और अधिकारों के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, यह निर्देश दिया जाता है कि 5 हफ्ते की अवधि के लिए और जब तक कि हाई कोर्ट द्वारा जमानत अर्जियों पर हिरासत के संबंध में अंतिम फैसला नहीं किया जाता, प्रतिवादियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है जो कि जांच में सहयोग के अधीन होगा. यह फैसला गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार, केरल के दो पूर्व पुलिस अधिकारियों एस विजयन और टीएस दुर्गा दत्त और एक सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी पीएस जयप्रकाश को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सीबीआई (CBI) की अपील पर आया.
