नई दिल्ली (मानवीय सोच) रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक जारी है और कल बुधवार को इसका फैसला आना है. इससे पहले अर्थशास्त्री और एक्सपर्ट कयास लगा रहे हैं कि महंगाई में नरमी को देख आरबीआई भी नीतिगत फैसलों में नरमी अपना सकता है. माना जा रहा है कि इस बार रिजर्व बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी तो करेगा, लेकिन यह पहले के मुकाबले काफी कम हो सकती है.
ब्लूमबर्ग ने आंकड़ों के हवाले से बताया है कि इससे पहले हुई एमपीसी बैठक पर खुदरा महंगाई का काफी दबाव रहता था और इस पर काबू पाने के लिए ही रिजर्व बैंक ताबड़तोड़ ब्याज दरें बढ़ा रहा था. आलम ये रहा कि मई से अब तक रिजर्व बैंक रेपो रेट में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी कर चुका है और यह 4 फीसदी से बढ़कर 5.90 फीसदी तक पहुंच गया है. बुधवार को एमपीसी बैठक के आने वाले फैसलों में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ाए जाने का अनुमान है, लेकिन इस बार महंगाई का उतना दबाव नहीं है, जिससे माना जा रहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी पहले से कम रहेगी.
कितना बढ़ सकता है ब्याज
आरबीआई के फैसलों से पहले इकोनॉमिस्ट के बीच कराए सर्वे में ब्याज दरों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. ब्लूमबर्ग ने 35 इकोनॉमिस्ट के बीच कराए सर्वे में बताया है कि ज्यादातर ने इस बार रेपो रेट में 0.35 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जबकि 3 सदस्यों ने 0.25 फीसदी और बाकी ने 0.10 से 0.30 फीसदी ब्याज दरें बढ़ाने का अनुमान है.
विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये में मजबूती
इकोनॉमिस्ट ब्याज दरों को लेकर राहत की उम्मीद इसलिए भी लगा रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से देश के विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार मजबूती आ रही है. अगर हम ट्रेंड को देखें तो अक्टूबर तक विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट दिख रही थी और एक समय यह 525 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया था, लेकिन नवंबर में यह दोबारा तेजी पकड़ने लगा और अभी 550 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इसी तरह रुपया भी डॉलर के मुकाबले अक्टूबर में 84 के स्तर तक चला गया था, लेकिन अब इसमें मजबूती लौट रही और यह 82 रुपये प्रति डॉलर से भी नीचे दिख रहा है
महंगाई भी नरम पड़ी
रिजर्व बैंक को नरम रुख अपनाने में इसलिए भी मदद मिल सकती है, क्योंकि खुदरा महंगाई के आंकड़े धीरे-धीरे काबू में आते दिख रहे हैं. सितंबर तक 7 फीसदी से ऊपर चल रही खुदरा महंगाई अक्टूबर में 6.7 फीसदी पर आ गई. इसके नवंबर में और नीचे आने का अनुमान है. फिलहाल यह आरबीआई के तय दायरे 6 फीसदी से ऊपर ही दिख रही है, लेकिन खुदरा महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक पर अब उतना दबाव नहीं रहा है. ऐसे में रेपो रेट बढ़ाते समय इस बार आरबीआई नरमी बरत सकता है.
