लखनऊ (मानवीय सोच) बिजली चोरी के इरादे से इलेक्ट्रॉनिक एवं स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ कराने वालों को यह बहुत भारी पड़ने वाला है। जांच में मीटर कम यूनिट (रीडिंग) बताते पकड़ा गया तो मोटा जुर्माना लगेगा। लेसा (लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई अथॉरिटी) ने सोमवार को एसटीएफ के बिजली मीटर को धीमा करने एवं मेमोरी बदलने वाले गिरोह को पकड़ने के बाद उपभोक्ताओं के मीटर की जांच कराने का फैसला लिया है।
लेसा सिस गोमती जोन के मुख्य अभियंता संजय जैन ने बताया कि बैठक में सभी अधिशासी अभियंताओं को इसके निर्देश दिए गए। उपभोक्ताओं के मीटर की जांच से पहले अधिशासी अभियंता को कार्यालय में बिलिंग का अध्ययन करते हुए विद्युत लोड एवं दर्ज हो चुकी यूनिट की समीक्षा करनी होगी। इसमें मीटर धीमा करने का अंदेशा हुआ तो जांच कराई जाएगी। उधर, मीटर धीमा करने व मेमोरी बदलने पर अंकुश के लिए निगम के निदेशक (वाणिज्य) योगेश कुमार ने मीटर बनाने वाली कंपनियों के एक्सपर्ट की बैठक बुलाई। इसमें मीटर को सुरक्षित करने के उपाय पूछे हैं। एक्सपर्ट दो दिन में सुझाव देंगे।
टेट्रा हाईफ्यूरान केमिकल से काटते थे मीटर की बाडी
गिरोह मीटर की बाडी काटने के लिए खास किस्म के रसायन टेट्रा हाईफ्यूरान का इस्तेमाल करता था। एसटीएफ की उपस्थिति में गिरोह के लोगों ने लेसा अभियंताओं को बताया कि सिरिंज से डाला जाने वाला यह केमिकल मीटर की बाडी को ऐसे काटता था जैसे कैंची से कागज कटता हो। बाडी कटने का कोई निशान नहीं पड़ने से मीटर में की गई छेड़छाड़ आसानी से नहीं पकड़ में आती थी।
सात दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी भवानी सिंह खंगारौत का कहना है कि लखनऊनिदेशक योगेश कुमार को जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। पता लगाने को कहा गया है कि गिरोह कैसे मीटर धीमा करता था। निगम के किस अधिकारी, कर्मचारी की मिलीभगत से खेल चल रहा था। इस पर रोकथाम के उपायों के संबंध में सात दिन में रिपोर्ट मांगी है।
गिरोह में शामिल बिजली कर्मियों पर हो कार्रवाई
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मीटर से छेड़छाड़ करके बिजली कंपनियों को चपत लगाने वाले गैंग में शामिल बिजलीकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। किसी उपभोक्ता की संलिप्तता होने पर उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। इस संबंध में उन्होंने सोमवार को पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज व प्रबंध निदेशक पंकज कुमार से मुलाकात की।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कु मार वर्मा ने कहा कि प्रथमदृष्टया इसमें बिजली कंपनियों के अभियंताओं और कर्मियों की भी भूमिका नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ मीटर निर्माता कंपनियां दावा करती हैं कि उनके मीटर की एमआरआई उनके ही सॉफ्टवेयर से की जा सकती है ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अलग-अलग कंपनियों के मीटरों की चिप की एक दूसरे से अदला-बदली कैसे होती रही? उन्होंने मीटर निर्माता कंपनियों को इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निर्माण संबंधी खामियां दूर कराने की सख्त हिदायत भी देने को कहा।
