लखनऊ (मानवीय सोच) यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) सीजी सिटी में अपनी कॉलोनी विकसित करेगा। शासन के आदेश पर एलडीए से मिली 86.83 एकड़ जमीन पर कॉलोनी के विकास के लिए आर्किटेक्ट कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चयन प्रक्रिया अगले माह पूरी हो जाएगी। इसके बाद प्रोजेक्ट डिजाइन व डीपीआर बनाने का काम शुरू हो जाएगा। मेट्रो की योजना है कि 2024 में कॉलोनी का निर्माण शुरू करा दिया जाए।
मेट्रो के एक अधिकारी ने बताया कि कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया में तकनीकी बिड अगले महीने की तीन जनवरी को खुल जाएगी। इसके बाद वित्तीय बिड की तारीख तय कर कंपनी फाइनल की जाएगी। इस कंपनी का काम कॉलोनी के विकास के लिए सलाह देने के अलावा निवेशकों को चिह्नित करना, निर्माण के समय टेंडर प्रक्रिया कराने में सहयोग करना होगा। मेट्रो कॉलोनी में आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की संपत्तियां विकसित की जाएंगी। इन संपत्तियों को इस तरह विकसित किया जाएगा जिससे अधिक से अधिक आय यूपीएमआरसी को हो सके।
यात्री किराया न बढ़े, इसलिए मेट्रो कॉलोनी जरूरी
मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों के संचालन खर्च का बोझ यात्री किराया पर न्यूनतम रखना जरूरी है। इससे किराया कम रखने में मदद मिलती है। यात्री किराया न बढ़े, इसके लिए संपत्तियों का विकास कर उनसे होने वाली कमाई से ही मेट्रो की आय बढ़ाई जाती है। मेट्रो कॉलोनी में भी व्यावसायिक व आवासीय संपत्तियों का निर्माण कर इनको किराए पर आवंटित किया जाएगा। किराया भी डीएम सर्किल रेट को ध्यान में रखते हुए तय होगा।
अभी है किराया बढ़ाने का दबाव
राजधानी में अभी एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के बीच 22.8 किमी दूरी में 21 स्टेशनों के बीच मेट्रो चलती है। कॉमर्शियल रन के शुरू होेने के बाद से अभी तक किराया संशोधित नहीं किया गया है। हालांकि, किराया बढ़ाने का लगातार दबाव बना हुआ है। इसे देखते हुए ही यूपीएमआरसी अलग स्रोत से आय के लिए प्रयासरत है।
