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नेपाल की कालीगंडकी के पत्थर से अयोध्या में बनेगी भगवान श्रीराम की मूर्ति

अयोध्या  (मानवीय सोच)   भगवान श्रीराम की मूर्ति बनाने के लिए नेपाल की कालीगंडकी नदी के पत्थरों को अयोध्या पहुंचाया जाएगा। उन पत्थरों को नेपाल बेनी से उत्तर गलेश्वरधाम तक 3 किमी क्षेत्र से लाया जाएगा। विशेषज्ञों की टीम कालीगंडकी में शालीग्राम पत्थर की पहचान करने में जुटी है।

बेनी नगर पालिका के प्रमुख सूरत केसी ने बताया कि कालीगंडकी नदी के जल प्रवाह से पवित्र किए गए 7 फीट लंबाई, 5 फीट चौड़ाई और 3.5 फीट मोटाई के 2 पत्थर की तलाश की जा रही। काली गंडकी ही विश्व की वह नदी है जिस नदी में शालीग्राम पत्थर मिलता है।

पूर्व नेपाल सरकार की कैबिनेट ने जनकपुर स्थित जानकी मंदिर के माध्यम से शिला को भारत भेजने का निर्णय लिया था। उसके बाद गंडकी राज्य सरकार  सैद्धांतिक समझौता किया। 19 नवंबर 2021 को राम जन्मभूमि तीर्थ कार्यालय ने अयोध्या में राम की मूर्ति बनाने के लिए कालीगंडकी पत्थर भेजने के लिए जानकी मंदिर को पत्र भेजा था। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय ने जनकपुरधाम और अयोध्याधाम के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मंत्रिपरिषद को यह प्रस्ताव दिया था।

कालीगंडकी को ही एक पवित्र नदी माना जाता

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शालिग्राम के कारण ही कालीगंडकी को ही एक पवित्र नदी माना जाता है। एक किंवदंती यह भी है कि कालीगंडकी के तट पर बेनी-गलेश्वर क्षेत्र में ऋषि पुलह, कपिल और जड़भरत ने तपस्या करके सिद्धि प्राप्त की थी। पुलाश्रम को सांख्यदर्शन के महामुनि कपिल का निवास स्थान भी माना जाता है।

पर्यटन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा
पाषाण अध्ययन, उत्खनन के सदस्य कुलराज चालिसे ने कहा कि यह क्षेत्र एक पवित्र भूमि है, इसलिए हम यहां कालीगंडकी नदी के निरंतर प्रवाह से पवित्र पत्थरों को निकालकर राम मंदिर अयोध्या पहुंचाएंगे। फिलहाल पत्थर को जनकपुर के रामजानकी मंदिर में रखा जाएगा। फिर सही समय पर अयोध्या में राम मंदिर पहुंचाया जाएगा। शिला लेने के लिए गुरु राजेंद्र सिंह पंकज अयोध्या से पोखरा पहुंचे हैं।

चालिसे ने कहा कि चूंकि यह नेपाल की देन है, इसलिए चट्टान को खोदकर अयोध्या तक पहुंचाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में आकर्षण का केंद्र श्रीराम की मूर्ति बनाने के लिए पत्थर पहुंचेगा। यह अयोध्या, जनकपुर और मुक्तिनाथ के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। पत्थर देने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

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