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चित्रकूट में 78 करोड़ खर्च कर बना 200 बेड का अस्पताल, 2019 से अब तक तैनात नहीं हुए डॉक्टर

चित्रकूट: (मानवीय सोच)   बुंदेलखंड के आकांक्षी जिले चित्रकूट की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली दूर करने के प्रति केंद्र और प्रदेश की सरकार गंभीर नहीं दिथ रही है। इसका अंदाजा नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 78 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 200 बेड वाले मातृ एवं बाल चिकित्सालय की स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग को भवन हैंडओवर होने के चार वर्ष बीत जाने के बाद भी महज डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती न हो पाने के कारण यह अस्पताल आज तक चालू नहीं हो सका। इसके चलते डिलीवरी आदि में स्थिति गंभीर होने पर प्रसूताओं को प्रयागराज, कानपुर और मध्य प्रदेश के सतना और जबलपुर आदि महानगरों के अस्पतालों की शरण लेना मजबूरी बनी हुुई है।

धार्मिक एवं पौराणिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश का चित्रकूट जनपद पिछले करीब चार दशकों तक दुर्दांत डकैतों की शरण स्थली रहने के कारण विकास से अछूता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं से पौराणिक नगरी के लोग आजादी के कई दशक के बाद भी जूझने को मजबूर है। विकास से वंचित जनपद को बुनियादी सुविधाओं से संतृप्त कर मुख्यधारा से जोड़ने की मंशा से केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड के चित्रकूट को आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल किया गया था। इसके बावजूद चित्रकूट की स्वास्थ्य सेवाएं आज भी वेंटिलेटर पर है। इलाज के अभाव में आए दिन मरीजों की असमय मौत का शिकार होना पड़ रहा है।

जनपद के खोह गांव में करीब 78 करोड़ की लागत से बने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस दौ सौ शैय्या वाले मातृ एवं बाल चिकित्सालय को कार्यदायी संस्था एचएलएल कान्सट्रक्शन सर्विस कंपनी द्वारा 2019 में निर्माण कार्य पूरा कर अस्पताल का भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था। डाक्टरों और कर्मचारियों की शासन द्वारा तैनाती न किए जाने के कारण भवन बनने के चार साल बाद भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल शुरू नहीं हो सका। इससे आकांक्षी जिले के लोगों को बेहतर उपचार के लिए महानगरों की शरण लेना मजबूरी बनी हुई है।

चित्रकूट समेत सूबे के पांच जिलों में बने है अत्याधुनिक 200 बेड के अस्पताल

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2015 में सूबे के विकास की दृष्टि से पिछड़े चित्रकूट समेत लखीमपुर खीरी, अंबेडकरनगर, अमेठी और सोनभद्र जनपद के लोगों नई सौगात दी थी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने के उद्देश्य से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 200 बेड के नए अस्पताल खोलने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मंजूरी मिलने के बाद इन अस्पतालों का निर्माण कराया गया था। इन अस्पतालों का निर्माण ‘टर्नकी’ आधार पर करवाया गया था। ताकि टेंडर आमंत्रित करने से बाद में उपकरण और फर्नीचर खरीद से लेकर अन्य चीजों के लिए अलग-अलग टेंडर आमंत्रित नहीं करने पड़ें।

सीएम योगी से की अस्पताल को शुरू करने की मांग

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद के खोह गांव में 200 बेड के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय और बांदा में बने 300 बेड के मंडलीय चिकित्सालय बनकर तैयार है।इन्हें शुरू कराने की मांग बांदा-चित्रकूट सांसद आरके सिंह पटेल ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। सांसद ने बुंदेलखंड से चित्रकूट मंडल के जनप्रतिनिधियों के साथ हुई सीएम की बैठक में कहा कि तैयार खड़े चिकित्सालयों को स्टाफ की तैनाती करा शुरू करना अत्यंत आवश्यक है। इससे पूर्व सांसद ने शून्यकाल के दौरान संसद में भी उपकरणों की उपलब्धता और चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती करा अस्पतालों को अभिलंब शुरू करने का मुद्दा उठाया था।

स्वास्थ्य विभाग कर रहा अस्पताल को शुरू कराने की पहल

चित्रकूट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेश द्विवेदी ने बताया कि जिले के खोह गांव में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 78 करोड़ की लागत से दो सौ बेड का मातृ एवं शिशु चिकित्सालय का निर्माण कराया गया था। निर्माण एजेंसी द्वारा 2019 में चिकित्सालय भवन विभाग को हैंडओवर किया गया था। बताया कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को पत्राचार किया जा रहा है। कर्मचारियों की तैनाती और उपकरणों की उपलब्धता होते ही अस्पताल को शुरू कर दिया जाएगा। बताया कि कोरोना काल में उक्त चिकित्सालय भवन को कोविड सेंटर के रूप में उपयोग किया गया था। मौजूदा समय ओपीडी सेवा के साथ-साथ डेंगू सेंटर बनाया गया है।

नए भवन में शुरू हो महिला एवं शिशु चिकित्सालय

राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री शानू गुप्ता ,समाजसेवी राजेश सोनी आदि का कहना है कि सरकार का बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा चित्रकूट में पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है। संयुक्त जिला अस्पताल महज रेफर सेंटर बना हुआ है। इलाज के अभाव में आए दिन मरीजों की असमय मौत हो रही है। उन्होेने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 200 बेड के अस्पताल को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है। साथ ही संयुक्त जिला अस्पताल से महिला एवं शिशु इकाई को नये अस्पताल में शुरू कराने की मांग की है।

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