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जेल में बंद फिर भी महिला ने कमाए 55 हजार रुपये

बांदा: (मानवीय सोच)   चित्रकूट मंडल मुख्यालय में स्थित मंडल कारागार में अपने गुनाहों की सजा काट रहे बंदियों को अपने परिवार की भी चिंता है। ये जेल में रहकर भी मेहनत मजदूरी करके पैसा जुटाते हैं और अपने बेटे की पढ़ाई, बेटी की शादी के लिए मजदूरी का पैसा भेजते हैं। जेल में इस समय 200 ऐसे बंदी है, जो मेहनत मजदूरी करके परिवार के लिए धन जुटा रहे हैं। जेल में बंद कैदियों से जेल प्रशासन द्वारा तरह-तरह के काम कराए जाते हैं। इसके एवज में बंदियों को मजदूरी भी दी जाती है। जेल के अंदर और बाहर सब्जियां उगाने का काम होता है। यही ताजी सब्जियां बंदियों को खिलाई जाती है। इसके अलावा अन्य काम भी कराए जाते हैं। पिछले कुछ समय में एक महिला ने जेल में ही मेहनत करते 55 हजार रुपये से ज्याद की कमाई की।

जेल में मजदूरी करने वाले कुशल मजदूर को 40 रुपए ,अकुशल मजदूर को 30 रुपए दिए जाते हैं। वहीं अकुशल महिला को 25 रुपए रोजाना मजदूरी दी जाती है। यह मजदूरी बंदियों को रिहाई के दौरान नगद और चेक के माध्यम से दी जाती है। इसके बाद भी अगर कोई बंदी अपनी मजदूरी का पैसा प्रतिमाह लेना चाहता है, तो उसका भी प्रावधान है। अगर कैदी अपना पैसा घर भेजना चाहता है तो जेल प्रशासन द्वारा चेक के माध्यम से उनका पैसा उनके घर भेज दिया जाता है।

मंडल कारागार में इस समय 580 कैदी और 322 बंदी है। इनमें से 200 से अधिक बंदी जेल में ही मजदूरी का काम करते हैं। जिन्हें शासन के मानक के अनुसार पारिश्रमिक दिया जाता है। दहेज हत्या के जुर्म में पिछले 5 वर्षों से जेल में बंद बदौसा कस्बे की संगीता ने मेहनत मजदूरी करके 55,255 रुपए जुटाए हैं, हालांकि उसका स्थानांतरण चित्रकूट जेल में हो गया है। जेल प्रशासन ने उसका यह पैसा चेक के माध्यम से उसके घर भेजा है। इसी तरह हत्या में पिछले 20 साल की सजा काट रहे बबेरू के श्रीलाल ने जेल में मजदूरी कर 32 हजार रुपए एकत्र किए हैं। उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई के लिए यह पैसा अपने घर भेज दिया है। इसी तरह हत्या के जुर्म में ही जेल में बंद गोरेलाल ने अपने बीमार माता पिता के इलाज और दवा के लिए 44,858 कमाए हैं। रामकेश ने 10,639 रुपए, कल्ली ने 20,500, राजेश ने 22,950, अखिलेश सिंह ने 19,025, कालीचरण ने 24,200, रहीस ने 17,449 और कल्लू उर्फ बच्चा ने 25,075 रुपए मजदूरी करके कमाए हैं। इनका यह पैसा परिवार की जरूरत के अनुसार उनके घर भेजा गया है।

चेक के माध्यम से घर भेजते हैं पारिश्रमिक

इस बारे में प्रभारी अधीक्षक कारागार बांदा वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मंडल कारागार में इस समय 200 ऐसे बंदी हैं जो बागवानी, खाना बनाने, खेती-बाड़ी आदि का कार्य करते हैं। जिन्हें शासन से निर्धारित पारिश्रमिक दिया जाता है। आमतौर पर पारिश्रमिक उन्हें रिहाई के समय दिया जाता है। लेकिन बंदी अगर अपने परिवार के जरूरत के मुताबिक पैसा घर भेजना चाहते हैं, तो उनके घर चेक के माध्यम से पैसा भेज दिया जाता है।

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