लखनऊ (मानवीय सोच) इन्वेस्टर्स समिट के दौरान लखनऊ में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन ने नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए कुल 1100 एकड़ जमीन चिह्नित की है। इस जमीन पर अनुमानित 8000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगेंगी। इनसे करीब दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय सचिव अवधेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि तीन नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 200, 400 एवं 500 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। प्रशासन ने अभी चिह्नित जमीन के बारे में एसोसिएशन से जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि ये औद्योगिक क्षेत्र मोहनलालगंज, आगरा एक्सप्रेस वे एवं आउटर रिंग रोड (निकट सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र) के पास विकसित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन औद्योगिक क्षेत्रों के लिए चिह्नित जमीन की घोषणा अभी नहीं करेगा, क्योंकि इसकी घोषणा होते ही किसान जमीन की कीमत बढ़ा देंगे।
1500 से 10 हजार वर्ग फीट में लग सकती हैं इकाइयां
उद्यमियों ने बताया कि इकाइयां लगाने के लिए 1500 से 10 हजार वर्ग फीट तक जमीन की जरूरत पड़ती है। छोटी इकाई 1500 वर्ग फीट में और बड़ी इकाई 5000 से 10,000 वर्ग फीट में आसानी से स्थापित हो जाती है। छोटी इकाई वाले परिसर को बहुमंजिला बनाकर उद्योग को बढ़ा लेते हैं। एक एकड़ में 43,560 वर्ग फीट जमीन होती है। उद्यमियों का अनुमान है कि 1100 एकड़ जमीन में 8000 से अधिक छोटी-बड़ी उत्पादन इकाइयां स्थापित हो जाएंगी।
खुद खरीदनी होगी जमीन, सुविधाएं देगी सरकार
अवधेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्रशासनिक अफसरों से कई चरणों में हुई बातचीत में यह भी पता चला कि उद्यमियों को निर्धारित क्षेत्र में खुद ही जमीन खरीदनी पड़ेगी। इसमें उद्योग लगाने की सभी सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन किसान से जमीन का अधिग्रहण करके विकसित करके उद्यमियों को बेचेगा। ऐसे में उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
दलित की जमीन के लिए स्पेशल परमीशन
उद्योग के लिए जो जमीन चिह्नित की गई है, उसके बीच में यदि किसी दलित किसान की जमीन आएगी तो जिला प्रशासन उसको भी खरीदने केे लिए स्पेशल परमीशन देगा। वहीं, ग्राम समाज की जमीन के एवज में संबंधित को दूसरी जगह जमीन मुहैया कराई जाएगी।
बिजली पहुंचाएगी सरकार, बनेगी सड़क
सरकार नए औद्योगिक क्षेत्रों को 132 केवी ट्रांसमिशन एवं 33 केवी उपकेंद्र के जरिये बिजली पहुंचाएगी। साथ ही सड़कों एवं सीवर का निर्माण कराया जाएगा। हालांकि, उद्योग को बिजली कनेक्शन लेने के दौरान 33 केवी एवं 11 केवी लाइन का निर्माण उद्यमी को खुद के खर्चे पर कराना होगा।
एक इकाई से 25 घरों की चलेगी रोजी-रोटी
प्रॉविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन लखनऊ इकाई के अध्यक्ष दिनेश गोस्वामी ने बताया कि एक नई औद्योगिक इकाई के स्थापित होने से औसतन 25 कामगारों को रोजी मिलेगी। इससे उनका परिवार चलेगा। यूं तो छोटी इकाई में 10 और बड़ी में 75 कामगारों को रोजगार मिलता है, लेकिन नए क्षेत्रों में अधिकतर मध्यम श्रेणी की ही इकाइयां स्थापित होंगी।
यूपी में महंगी है औद्योगिक बिजली
आईआईए के राष्ट्रीय सचिव सूर्य प्रकाश हवेलिया ने कहा कि दूसरे राज्यों के मुकाबले यूपी में बिजली काफी महंगी है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि औद्योगिक बिजली को सस्ता करें। यूपी में औद्योगिक बिजली औसतन 9.50 रुपये प्रति यूनिट और छत्तीसगढ़ में 7.50 रुपये प्रति यूनिट है।
उद्यमियों को जमीन मुहैया कराना पहला लक्ष्य
इन्वेस्टर्स समिट के दौरान लखनऊ मेें निवेश करने वाले उद्यमियांे को औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए जमीन मुहैया कराना हमारा पहला लक्ष्य है। इसमें जिला प्रशासन का सहयोग लिया जा रहा है। इसके लिए तीन क्षेत्रों में जमीन चिह्नित की गई है।
