लखनऊ (मानवीय सोच) विधायिका का मुख्य कार्य कानून बनाना है लेकिन विधान सभा में कई बार विधेयक बिना चर्चा के एक झटके में पारित करा लिए जाते हैं। इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए विधान सभा की कार्यवाही के संचालन के लिए तैयार की जा रही नई नियमावली में ऐसे प्राविधान किये जा रहे हैं कि विधायन पर चर्चा अनिवार्य हो। समुचित चर्चा के बाद पारित हुआ विधेयक जब कानून की शक्ल लेगा तो वह अधिक परिपक्व और व्यावहारिक होगा। इसके लिए दस सदस्यीय समिति द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 2023 तैयार की जा रही है।
तैयार की जा रही उप्र विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 2023
अभी विधान सभा की कार्यवाही 1958 की नियमावली के तहत संचालित होती है। बीते 65 वर्षों के दौरान पुरानी नियमावली के कई प्राविधान अप्रासंगिक हो चुके हैं। नेशनल ई-विधान लागू होने से आनलाइन कार्यप्रणाली को भी नियमावली में समाहित करना अपरिहार्य हो गया है। नई नियमावली के लागू होने पर विधान सभा सदस्यों को प्रश्नकाल के दौरान सरकार से सवाल करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा। सदन में प्रश्नकाल की अवधि को 10 मिनट बढ़ाकर डेढ़ घंटा करने की तैयारी है। अभी सदन में प्रश्नकाल की अवधि सुबह 11 से दोपहर 12.20 बजे तक होती है। अब इसकी अवधि बढ़ाकर 12.30 बजे तक करने का प्रस्ताव है।
सदन में पेश किये गए विधेयक पर चर्चा कराना होगा अनिवार्य
सदन में एक ही प्रश्न अन्य सदस्यों को सवाल पूछने के अवसर से वंचित न कर दे, इसलिए तारांकित प्रश्नों के उत्तर से उपजने वाले अनुपूरक प्रश्नों की संख्या को अधिकतम दो या तीन तक सीमित करने की मंशा है। अभी सदन में एक दिन में किसी विभाग से संबंधित 20 तारांकित प्रश्न ही लग सकते हैं। नई नियमावली में यह व्यवस्था की जा रही है कि 20 से अधिक तारांकित प्रश्नों को अतारांकित मानते हुए सरकार की ओर से उसी दिन उनका जवाब आएगा। नई नियमावली में कार्यस्थगन प्रस्तावों की संख्या और समय भी तय होगा। असरकारी दिवस पर सदन में विपक्षी सदस्यों के प्रस्तावों/संकल्पों को लेना बाध्यकारी बनाया जाएगा।
ताकि न आएं एक ही विषय पर अलग-अलग नोटिसें
अभी एक ही विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अविलंबनीय लोक महत्व के विषय और कार्यस्थगन प्रस्ताव के अंतर्गत सदस्यों की अलग-अलग नोटिसें आ जाती हैं। इसलिए तीनों प्रकार की नोटिस को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का भी प्रस्ताव है। वहीं नियम 311 के तहत सदस्य को यह स्पष्ट करना होगा कि वह किस प्रयोजन के लिए कौन सा नियम शिथिल कराना चाहते हैं।
वर्चुअल उपस्थिति और ई-बुक का प्राविधान
नेशनल ई-विधान के कारण नई नियमावली में सदस्यों की वर्चुअल उपस्थिति, सूचनाओं/प्रस्तावों को आनलाइन उपलब्ध कराने और टैबलेट पर विधानसभा की कार्यसूची और संबंधित साहित्य को आनलाइन प्रदर्शित करने के लिए ई-बुक के लिए भी प्राविधान किये जा रहे हैं।
सदन आहूत करने को सात दिन का समय
सदस्यों को विधान सभा का सत्र आहूत होने की नोटिस 14 दिन के बजाय अब सात दिन पहले देने की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री सदन में कोई संकल्प प्रस्तुत करना चाहेंगे तो उन्हें इसकी आनलाइन/लिखित सूचना मौजूदा सात दिन की बजाय पांच दिन पहले देनी होगी।
बजट सत्र में नई नियमावली को दी जाएगी मंजूरी
नई नियमावली को ड्राफ्ट करने वाली समिति के अध्यक्ष प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप दुबे ने बताया कि नियमावली तैयार करने का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ड्राफ्ट तैयार होने पर विधान सभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित नियम समिति इसका परीक्षण करेगी। नियम समिति के सुझावों को समाहित करते हुए नई नियमावली को बजट सत्र में सदन की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
