बजट 2023 से पहले बाजार में ‘ब्लैक फ्राइडे’!

मुंबई   (मानवीय सोच)   25 जनवरी को मंथली एक्सपायरी के दिन गिरावट के साथ बंद हुए बाजार में आज फिर जबरदस्त तरीके से मंदी हावी  है. बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स 2 फीसदी तक टूट गए हैं. सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन में सभी सेक्टर्स में बिकवाली हावी है, लेकिन सबसे ज्यादा पिटाई बैंकिंग शेयरों की हुई है. फाइनेंशियल स्टॉक्स में पीसीएयू बैंकों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है. वहीं, एनर्जी सेक्टर भी 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया है.

अडानी पोर्ट्स, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी ग्रुप के अन्य शेयरों के साथ-साथ आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और बीपीसीएल, निफ्टी के इन शीर्ष स्टॉक्स में गिरावट हावी रही. वहीं, निफ्टी ऑटो, एफएमसीजी और फॉर्मा इंडेक्स में ज्यादा गिरावट नहीं दिखी है.

मजबूत वैश्विक संकेतों के बावजूद भारतीय बाजारों में गिरावट हैरान करने वाली है. दरअसल निवेशक बजट 2023 से पहले घबराए हुए हैं. दलाल स्ट्रीट पर हावी मंदी के 4 बड़े कारण ये हैं…

बजट 2023 का डर!
बाजार में सक्रिय निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने खर्च को जारी रखेगी और निजी क्षेत्र से अधिक धन आकर्षित करने के उपायों की घोषणा करेगी. अगर बाजार की उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं तो बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है. बजट में FY24 राजकोषीय घाटे के नंबर को भी उत्सुकता से देखा जाएगा. विदेशी ब्रोकरेज मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि वित्तीय घाटा वित्त वर्ष 2023 के 6.4 प्रतिशत के मुकाबले वित्त वर्ष 24 में सकल घरेलू उत्पाद का 5.9 प्रतिशत होगा.

दिग्गज शेयरों में गहराई गिरावट
अदानी पोर्ट्स और अदानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में लगातार बिकवाली हावी है. आज ये स्टॉक क्रमशः 12 प्रतिशत और 7 प्रतिशत तक टूट गए. 25 जनवरी को अदाणी पोर्ट्स 6.3 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ था. वहीं, अन्य दिग्गज शेयर एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी 2-5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

UN ने घटाया भारत का जीडीपी अनुमान
संयुक्त राष्ट्र ने सख्त मौद्रिक नीति और कमजोर वैश्विक मांग के प्रभाव का हवाला देते हुए कैलेंडर वर्ष 2023 के लिए भारत के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद के विकास के अनुमान को घटाकर 5.8 प्रतिशत कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र की विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2023 की रिपोर्ट में कहा, “भारत में विकास दर 5.8 प्रतिशत पर मजबूत रहने की उम्मीद है, हालांकि 2022 में अनुमानित 6.4 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा कम है, क्योंकि उच्च ब्याज दर और वैश्विक मंदी निवेश और निर्यात पर निर्भर करती है.”

विदेशी निवेशकों की बिकवाली
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, ‘एफआईआई की लगातार बिकवाली से बाजार की धारणा प्रभावित हुई है, जहां बेहतर वैल्युएशन के कारण पूंजी को अन्य उभरते बाजारों में ट्रांसफर किया जा रहा है.’ वहीं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था का विस्तार अक्टूबर से दिसंबर तक 2.9 प्रतिशत वार्षिक गति से हुआ, जो उम्मीद से बेहतर था. अर्थशास्त्रियों ने 2.3 प्रतिशत की वृद्धि की भविष्यवाणी की थी. यह बताता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबी अवधि के लिए तेजतर्रार रह सकता है.

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