लखनऊ (मानवीय सोच) डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के कुलपति प्रो. पीके मिश्रा को पद के दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितता के कारण हटाया गया है। इतना ही नहीं वह राजभवन की ओर से जारी दिशा-निर्देश और जांच में भी सहयोग नहीं करते रहे हैं। राजभवन की ओर से जारी पांच पेज के विस्तृत आदेश में प्रो. पीके मिश्रा को हटाने से संबंधित सभी कारण बताए गए हैं।
राजभवन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. अनुराग त्रिपाठी व आईईटी के पूर्व निदेशक प्रो. विनीत कंसल की ओर से प्राप्त शिकायत में काफी गंभीर आरोप प्रो. मिश्रा पर लगाए गए थे। इसे देखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन अग्निहोत्री की एक जांच कमेटी बनाई गई। जिसने अपनी प्राथमिक जांच में प्रथम दृष्टया सही पाया गया। इसके अनुसार प्रो. पीके मिश्रा ने आईएसएस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को रखने में गंभीर वित्तीय अनियमितता की और व्यक्तिगत हित साधा।
वहीं, 10 जनवरी 2023 को हुई कार्य परिषद की बैठक में पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर काम किया जबकि बैठक का कोरम पूरा नहीं था। बता दें कि इस बैठक में आईईटी के निदेशक प्रो. विनीत कंसल को हटाए जाने के निर्णय और पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. अनुराग त्रिपाठी आदि के त्यागपत्र पर मुहर लगाई गई थी। इस तरह विभिन्न मामलों में गड़बड़ी की शिकायत और जांच न्यायाधीश द्वारा एकत्र पर्याप्त सबूतों के आधार पर यह पाया गया कि प्रो. मिश्रा पद का दुरुपयोग कर हैं। जिसे देखते हुए उनको हटाने का निर्णय लिया गया।
पीके मिश्रा पर भारी पड़ा पाठक के खिलाफ जांच कमेटी बनाना
