लखनऊ: (मानवीय सोच) देश भर में कई राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का विरोध कर रहे हैं। इस बीच मल्टी पोस्ट ईवीएम से भी मतदान की तैयारी हो रही है। इसके तहत एक ही ईवीएम से एक साथ कई पदों के लिए वोट डाले जा सकेंगे। ऐसी ईवीएम औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) ने बनाई है। इससे स्थानीय निकाय चुनाव में काफी मदद मिलेगी, जहां कई पदों के लिए एक साथ वोटिंग होती है। इन मशीनों की टेस्टिंग के साथ राज्यों के चुनाव आयुक्तों के साथ कई दौर की मीटिंग भी हो गई है। माना जा रहा है कि इसी साल जुलाई से नई ईवीएम का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के ट्रेड शो में आईटीआई के स्टॉल पर मल्टी पोस्ट ईवीएम (EVM) का प्रदर्शन किया जा रहा है। आईटीआई रायबरेली के अडिशनल जनरल मैनेजर कौशल कुमार ने बताया कि अभी तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव ईवीएम से होते हैं। अगर ये चुनाव भी एक साथ होते हैं तो दो मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब एक ही मशीन से कई पदों के लिए वोट डाले जा सकेंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों के चुनाव में होगा। इसमें ग्राम प्रधान से लेकर सदस्य तक कई पदों के लिए एक साथ वोटिंग होती है। अभी तक ये चुनाव बैलट पेपर से ही करवाए जाते हैं।
यूपी में तीन आईटीआई में होगी निर्माण
आईटीआई बेंगलुरु के डिप्टी चीफ इंजिनियर सीपी द्विवेदी ने बताया कि मल्टी पोस्ट ईवीएम आईटीआई बेंगलुरु ने विकसित की है। यूपी में रायबरेली, मनकापुर और नैनी में इन मशीनों का निर्माण हो सकता है, जो जुलाई से शुरू भी हो जाएगा। मौजूदा योजना के मुताबिक, इनका निर्माण आईटीआई में ही होगा। जरूरत पड़ने पर सरकार किसी प्राइवेट पार्टनर के साथ मिलकर भी मशीनें बनवा सकेगी।
ऐसे काम करेगी एमपीईवीएम
आईटीआई रायबरेली के एजीएम केके मिश्र ने बताया कि मल्टी पोस्ट ईवीएम में बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट अलग-अलग होंगी। इसमें आठ पदों के लिए और 225 प्रत्याशियों के नाम दर्ज करने की क्षमता है। हर पद के सामने उसके उम्मीदवारों के नाम होंगे। मतदाता हर एक पद के लिए एक-एक बटन दबाएगा। बाद में कंट्रोल यूनिट में अलग-अलग पदों पर उसका डेटा इकट्ठा हो जाएगा।
दुश्मन नहीं सुन सकेंगे सैनिकों की बातें
आईटीआई ने सेना के लिए आईपी इन्क्रिप्टर भी तैयार किया है। सैन्य अफसर अपने सैनिकों को या सैनिक आपस में बात करेंगे तो कोई तीसरा बीच में आवाज नहीं सुन सकेगा। अगर सैनिक आपस में मोबाइल पर भी बात करेंगे तो बीच में डिक्रिप्ट नहीं किया जा सकेगा। इस आईपी इन्क्रिप्टर के जरिए आवाज को पहले ही इन्क्रिप्ट कर दिया जाता है। इसके बाद संदेश पहुंचते पर ही यह डिक्रिप्ट होती है।
