अल्लाह शब्द संस्कृत का, पुरी पीठ के शंकराचार्य बोले- सबके पूर्वज सनातनी

वाराणसी  (मानवीय सोच)  जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी के बयान पर पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि  अल्लाह शब्द संस्कृत का शब्द है। स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि अल्लाह शब्द मातृ वाचक और शक्तिवाचक शब्द है। ओम तो परमात्मा का नाम है।

बुधवार को वाराणसी में मीडिया से बातचीत में स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि धर्म पर सवाल उठाने वाले लोग संस्कृत व्याकरण का अध्यन करें। हम सबके पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य ही थे। मीडिया से बातचीत में पुरी पीठ के शंकराचार्य ने बागेश्वर धाम का समर्थन किया।

राजनीति और धर्म अलग-अलग नहीं

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हिंदुओं को भटकने से बचा रहे हैं। भगवान का नाम लेते हैं। वो अच्छा काम कर रहे हैं। धीरेंद्र कृष्ण अपनी ओर से कभी नहीं कहते कि उन्होंने चमत्कार किया। वो हमेशा कहते हैं कि हनुमान जी की कृपा है। राजनीति में धर्म के इस्तेमाल होने पर कहा कि दोनों एक दूसरे से अलग-अलग नहीं हैं। उन्होंने संस्कृत के कुछ शब्दों का जिक्र कर कहा कि धर्म के बिना राजनीति हो ही नहीं सकती। 

2024 में नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री रहेंगे

रामचरितमानस से एक चौपाई हटाने की मांग पर शंकराचार्य ने कहा कि उन लोगों में हिम्मत है तो बाइबल और कुरान पर कटाक्ष करके दिखाएं। फिर क्या होता है, वह देखेंगे। रामचरितमानस पर टिप्पणी करने वाले लोग चाणक्य नीति का अध्ययन करें।  एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि 2024 में नरेंद्र मोदी ही
प्रधानमंत्री रहेंगे। क्योंकि वह देश को लूटने वाले और अपने घर को भरने वाले नहीं हैं।

 

भारत के हिंदू राष्ट्र बनने के इंतजार में 15 देश

स्वामी निश्चलानंद वाराणसी दौरे पर हैं। मंगलवार को अस्सी घाट पर प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि मारीशस सहित 15 देश भारत के हिंदू राष्ट्र होने का इंतजार कर रहे हैं। यह औपचारिकता जैसे ही पूरी होगी, वैसे ही एशिया के अलग-अलग देश खुद को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देंगे।  उ

न्होंने कहा कि देश में कुछ युवतियों के साथ जो हुआ, वह आधुनिक शिक्षा पद्धति की दिशा हीनता को दर्शाता है। अगर मातृ शक्ति का सम्मान नहीं हुआ तो दुनिया में कुछ नहीं बचेगा। मातृ शक्ति की रक्षा सनातनी परंपरा है। मर्यादा और गोत्र को ध्यान में रखकर ही मातृ शक्ति को कोई कदम उठाना चाहिए। 

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