लखनऊ (मानवीय सोच) बिजली विभाग के हड़ताल से उपभोक्ताओं को हुए नुकसान का अब मुआवजा मांगा जाएगा। इसको लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने नियामक आयोग में प्रत्यावेदन लगाने की बात कही है । 65 घंटे की हड़ताल से प्रदेश में सैकड़ों जगह पर 20 – 20 घंटे के लिए लाटइ गई थी। करीब 50 लाख उपभोक्ता सीधे प्रभावित हुए थे। इसमें उपभोक्ताओं के लिए करीब 600 करोड़ रुपए की मांग की गई है।
कर्मचारियों ने इन मांगों के लिए किया था हड़ताल
- 9 साल, 14 साल और 19 साल की सेवा के बाद तीन प्रमोशन वेतनमान दिया जाए।
- निर्धारित प्रक्रिया के तहत चेयरमैन, प्रबन्ध निदेशकों व निदेशकों का चयन किया जाए।
- बिजली कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए।
- ट्रांसफॉर्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश वापस लिए जाए।
- 765/400/220 केवी विद्युत उपकेंद्रों को आउट सोर्सिंग के जरिए चलाने का निर्णय रद्द हो।
- आगरा फ्रेंचाईजी व ग्रेटर-नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाए।
- ऊर्जा कर्मियों की सुरक्षा के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
- तेलंगाना, पंजाब, दिल्ली, ओडिशा की तरह ऊर्जा निगमों के समस्त संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए।
- बिजली कर्मियों को कई साल से लंबित बोनस का भुगतान दिया जाए।
- भ्रष्टाचार-फिजूलखर्ची रोकने के लिए 25 हजार करोड़ के मीटर खरीद के आदेश को रद्द किया जाएं।
