लखनऊ (मानवीय सोच) शहरी निकाय चुनाव में बसपा दलित-मुस्लिम समीकरण बनाने की कोशिश में लगी है। पर, यह उसके लिए आसान नजर नहीं आ रहा है। गांव चलो अभियान में बसपा ने इसी समीकरण पर मुख्य फोकस किया था, पर इसका ऐसा सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया जिसकी बसपा सुप्रीमो मायावती को उम्मीद थी।
हालांकि इससे गांवों में बसपा ने अपना आधार मजबूत करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी और इसमें कुछ लोगों को जोड़ा भी गया। ऐसे में सभी कोऑर्डिनेटरों से कहा गया है कि जिन सीटों पर दलित और मुस्लिम मिलकर जीत हासिल कर सकते हों, वहां दोनों को ही बसपा से जोड़ने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया जाए। इसी समीकरण के साधने वाले उम्मीदवार चुने जाएं।
प्रदेश में कुल 17 नगर निगम, 199 नगर पालिका परिषद और 544 नगर पंचायतों में चुनाव हो रहा है। इसके लिए बसपा ने फिर से मुस्लिमों को जोड़ने की आस लगाई है। कोआर्डिनेटरों से कहा गया है कि मुस्लिमों को यह समझाया जाए कि दलित मुस्लिम मिलकर ही भाजपा की राह रोक सकते हैं। इसके लिए गांव चलो अभियान शुरू किया गया था, जिसमें मुस्लिमों को जोड़ने के लिए कैडर कैंप लगाए गए।
