प्रयागराज: (मानवीय सोच) ‘जहां आप खड़े हैं ना, यही घटनास्थल था। बाहर ये लोग जीप से निकले हैं। वो उस तरफ दुकान है ना, शादाब जूस कॉर्नर…जैसे कि उधर कोई खड़ा रहा हो, जिसने अतीक भाई को नमस्कारी की। अतीक भाई जीपवा से बाहर निकले तो गर्दन हिलाकर उसको इशारा भी किए। इसके बाद वही अंदर आए हैं…। आप समझ लीजिए कि 17-18 सेकंड में सब फायरिंग हुई होगी। 29 राउंड गोली चली थी। यहीं फर्श पर सब 29 गोला बनाए थे, चॉक से। जहां खून था, वहां फरेंसिंक हो जाने के बाद ब्लीचिंग पाउडर डाल दिए थे। ना डालते तो निशान बन जाता ना।’
प्रयागराज के खुल्दाबाद थाने के अंतर्गत आने वाले मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में खड़े एक स्थानीय पत्रकार ने कुछ ऐसे ही घटना की आपबीती सुनाई। पिछले हफ्ते के शनिवार यानी 15 अप्रैल को इसी अस्पताल में अतीक अहमद और अशरफ को मेडिकल के लिए लाया गया था। घटना के बाद से ही अस्पताल में ऐसी ही चर्चाएं रोज होती हैं। शनिवार को एनबीटी की एक टीम यहां पर पहुंची तो एक स्थानीय पत्रकार ने यही कहानी हमें भी सुनाई।
