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टाइटैनिक का मलबा देखने गए दौलतमंद खुद ही गुम हो गए

नई दिल्ली : (मानवीय सोच) दुनिया के नक्शे पर 1912 में टाइटैनिक जैसे जहाज के डूबने की त्रासदी मनुष्य सभ्यता के इतिहास में कभी ना भूलने वाली एक दुर्घटना है। एक भव्य, विशाल और मनुष्य की नायाब व होशियार इंजीनियरिंग का यह नमूना जहाज पल भर के अंदर एक रात में समुद्र के अंदर खो गया।

घटना घट गई और त्रासदी का यह हिस्सा दुनियाभर के लिए एक सबक बन गया। समंदर और टाइटैनिक का डूबना जहां हम पृथ्वीवासियों के लिए इतिहास की सबसे दुख से भरी सीख का हिस्सा है वहीं फिल्म, किताबों और दस्तावेजों के साथ पीढ़ियों के लिए कौतुहूल और जिज्ञासा का एक किस्सा।

टाइटैनिक के डूबने की कहानी

10 अप्रैल, 1912 यह वही दिन था, जब इंग्लैंड के साउथैम्पटन से न्यूयोर्क सिटी के लिए टाइटैनिक अपने सफर की पहली शुरुआत करता है। यह कोई आम समुद्री जहाज नहीं था बल्कि अद्भुत इंजीनियरिंग का नायाब नमूना था।

टाइटैनिक 20वीं सदी की शुरुआत में विलासिता, प्रगति और आलीशान सुविधाओं का प्रतीक था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जहाज की बनावट के पीछे एक अद्भत इंजीनियरिंग काम कर रही थी। 

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