प्रयागराज : (मानवीय सोच) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के खिलाफ यूपी राजस्व संहिता के तहत कुशीनगर जिले में उनके नाम पर संपत्ति अधिग्रहण की चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची यह बता पाने में असमर्थ रही कि दलाई लामा ने भूमि खरीदने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति नहीं ली। लिहाजा कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। शोभा सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ विचार कर रही थी।
याची की ओर से कहा गया कि वह शिक्षिका हैं और रोटरी क्लब कुशीनगर की सक्रिय सदस्य हैं। समाचार पत्रों के माध्यम से उनको यह जानकारी प्राप्त हुई। उसने दलाई लामा के भारतीय नागरिक होने की जानकारी गृह मंत्रालय से मांगी। जवाब मिला कि वह भारतीय नागरिक नहीं है। याची ने कहा कि यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 90 के साथ पठित जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 154ए के तहत कोई विदेशी व्यक्ति भारत में संपत्ति का स्वामित्व नहीं हासिल कर सकता है।
