मिर्जापुर : (मानवीय सोच) शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर महागौरी स्वरूप मां विंध्यवासिनी के दर्शन को विंध्याचल धाम में आस्था का संगम दिखा। भक्तों ने दर्शन-पूजन कर पुण्य की कामना की। मंगला आरती के बाद भक्तों के दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ, जो अनवरत जारी है। अष्टभुजा और कालीखोह मंदिरों में भी अन्य दिनों की अपेक्षा बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
मंदिरों में मत्था टेकने के बाद भक्त त्रिकोण परिक्रमा को निकल रहे हैं। सुबह 10 बजे तक दो लाख से अधिक भक्तों ने श्रद्धा भाव से माता के धाम में शीश झुकाकर सुख-समृद्धि की कामना की। गुड़हल, गुलाब और कमल के पुष्पों से मां का श्रृंगार किया गया। भव्य श्रृंगार देख श्रद्धालु निहाल हो उठे । घंटा, शंख, नगाड़ा और माता के जयकारे से मंदिर में चारों दिशाएं गुंजायमान है। गंगा घाटों पर स्नान करने के बाद मां के दरबार में पहुंचे भक्तजनों ने बड़े ही भक्ति भाव से दर्शन-पूजन किया। मंदिर पहुंचने के बाद कोई गर्भगृह से तो कोई झांकी से माता के भव्य स्वरूप का दीदार किया। भक्त हाथ में नारियल-चुनरी, माला-फूल, कपूर-धूपबत्ती एवं प्रसाद लेकर विंध्यधाम पहुंचे।
