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# कछुआ तस्करी का गढ़ बना अमेठी

अमेठी : (मानवीय सोच) कछुओं की तस्करी के तार पूर्वांचल से लेकर पश्चिम बंगाल तक जुड़े हैं। आसपास के जिलों से कछुए पकड़कर अमेठी लाए जाते हैं। यहां से अलग-अलग माध्यम से पश्चिम बंगाल तस्करी की जाती है। यहां से उन्हें कोलकाता भेजा जाता है। फिलहाल, पुलिस अब पूरे गिरोह को खंगालने में जुटी हुई है। बुधवार को जगदीशपुर में 1,167 कछुओं की बरामदगी के बाद पुलिस ने पड़ताल तेज कर दी है। लोगों की मानें तो आसपास के जिलों और अमेठी सुल्तानपुर के नदी के किनारे वाले इलाकों व बड़े तालाबों से कछुओं को पकड़ा जाता है। आमतौर पर एक समुदाय के लोग लगाए जाते हैं।

तस्करों के एजेंट उन्हें एक कछुए के लिए दो से तीन सौ रुपये देते हैं। कछुओं को इकट्ठा कर उन्हें तस्करी के जरिए पश्चिम बंगाल भेजा जाता है। पश्चिम बंगाल पहुंचने पर एक कछुए की कीमत करीब एक हजार हो जाती है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल पहुंचने पर कछुओं के मांस समेत अलग-अलग अंगों की कीमत निर्धारित होती है।

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