वाराणसी : (मानवीय सोच) करीब तीन दशक से हो रही रामनगर की काली पूजा विरल और अद्भुत है। तड़क-भड़क से दूर स्वाभाविक से लगने वाले पंडाल, पूजा मंडप और आडंबर से बहुत दूर की साज सज्जा इस पूजा को दिव्य और खास बना देती है। खास बात ये कि इस पूजा के प्रसाद के रूप में लोग यहां के मंडप में लगने वाली ईंट और मिट्टी ले जाते हैं।
काली पूजा समिति की ओर से इस काली पूजा का आयोजन रामनगर चौक में होता है। इस पूजा का सबसे खास आकर्षण यहां का पूजा मंडप है। ईंट और मिट्टी के साथ साथ खर पतवार से यह मंडप बनता है। मंडप बनाने में दो हजार नई ईंटों का इस्तेमाल होता है। ईंटों का बेस बनाकर उसमें मिट्टी भरकर पूजा मंच बनाया जाता है।
फिर गोबर से लेप कर दिया जाता है। इसके चारों तरफ खर पतवार से घेर कर मंडप तैयार किया जाता है। इसी स्वाभाविक मंडप में रविवार की रात मां काली की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की गई। दो दिवसीय पूजा समारोह के लिए रामनगर चौक को विद्युत झालरों से सजाया गया।
