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बीते 62 साल में जवाहर लाल नेहरू के अलावा किसी प्रधानमंत्री को नहीं मिला है लगातार तीन जनादेश

पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई ऐसे चौंकाने वाले निर्णय लेते रहे हैं, जिसे लगभग असंभव माना जाता रहा था। अब जब वह प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीसरी पारी के लिए मैदान में खड़े हैं तो सामने एक लक्ष्य है जो अब तक संभव नहीं हुआ है। पंडित जवाहरलाल नेहरू को छोड़कर कोई लगातार तीसरी बार नहीं जीत पाया है, लेकिन पीएम मोदी का खुद का विश्वास इतना प्रबल है और राजनीतिक माहौल उनके लिए इतना सकारात्मक है कि फिलहाल यह पड़ाव दूर नहीं दिख रहा है।

इसके अतिरिक्त इस बार पीएम मोदी के नेतृत्व में राजग 1984 में कांग्रेस को मिलीं 415 सीटों के कीर्तिमान से भी आगे निकलने की कोशिश कर सकता है। उस समय कांग्रेस को 48.5 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे और इस बार भाजपा इससे आगे निकलने की तैयारी करती नजर आ रही है।

तीसरी बार जनादेश की ओर मोदी

विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए अपने हौसले के दमखम से लोकसभा का चुनावी रिवाज नहीं बदलने देने की उम्मीद कर रहा है। देश में हुए अब तक के 17 लोकसभा चुनावों में नेहरू के अलावा किसी प्रधानमंत्री को लगातार तीसरी बार जनादेश नहीं मिला है। इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में तीन पूर्ण कार्यकाल जरूर मिले हैं, मगर इसमें एक चुनाव का ब्रेक भी शामिल है। डा. मनमोहन सिंह भी लगातार दो पूर्ण कार्यकाल के बाद तीसरी बार सत्ता में आने की राह नहीं बना पाए थे।

दिग्गजों के हाथ रही देश की बागडोर

देश की स्वतंत्रता के बाद 1947 में प्रधानमंत्री बने पंडित नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस 1952, 1957, 1962 का लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रही। इसी बीच 1964 में पंडित नेहरू के देहांत के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने। लेकिन 1966 में ही उनका भी देहांत हो गया और उन्हें लोकसभा चुनाव में जनादेश के लिए जाने का मौका नहीं मिला।

शास्त्री के बाद इंदिरा गांधी ने देश की बागडोर संभाली और 1967 के लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में लौटी। पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश का निर्माण करने के परिप्रेक्ष्य में इंदिरा गांधी ने 1972 के चुनाव में लगातार दूसरी बार जनता का भरोसा जीता, मगर आपातकाल प्रकरण के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में हार ने लगातार तीसरी पारी की राह पर विराम लगा दिया।

1977 में जनता सरकार के पीएम बने मोराराजी देसाई की सरकार 1979 में गिर गई और बतौर पीएम चुनाव में जाना उन्हें नसीब नहीं हुआ। देसाई की जगह पीएम बने चौधरी चरण सिंह के रहते हुए 1980 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी को तीसरी पारी जरूर मिली, मगर तीन साल के ब्रेक के बाद। अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने ओर 1984 के आखिर में हुए आम चुनाव में अब तक के रिकार्ड बहुमत 415 सीटों के साथ सत्ता हासिल की।

1989 के आम चुनाव में राजीव को लगातार दूसरी पारी नहीं मिल पायी। जनता दल नेता वीपी सिंह भाजपा और वाम दलों के समर्थन से पीएम बने। मगर 11 महीने में ही यह सरकार गिर गई। उनके स्थान पर कांग्रेस के बाहरी समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार बनी, जो चार महीने रही। 1991 में आम चुनाव हुआ। इसी चुनाव के दौरान कांग्रेस के पीएम उम्मीदवार राजीव गांधी की निर्मम हत्या हो गई और कांग्रेस की जीत के बाद पीवी नरसिंह राव 1991 में प्रधानमंत्री बने। हालांकि 1996 के चुनाव में राव को हार का सामना करना पड़ा।

चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला तो सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिन की भाजपा की सरकार बनी जो बहुमत नहीं जुटा पायी। फरवरी-मार्च 1998 में लोकसभा चुनाव के बाद अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और भाजपा के नेतृत्व में 24 पार्टियों के राजग गठबंधन की पहली सरकार बनी मगर अप्रैल 1999 में 13 महीने में ही वाजपेयी सरकार एक वोट से लोकसभा में बहुमत खो बैठी और चुनाव की नौबत आ गई।

इसी दरम्यान मई से जुलाई के बीच पाकिस्तान से कारगिल युद्ध छिड़ गया, जिसके कारण चुनाव 1999 के सितंबर-अक्टूबर में हुए और वाजपेयी बतौर पीएम लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटे। पांच साल का कार्यकाल पूरा किए बिना लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने का दिलचस्प रिकार्ड भी वाजपेयी के नाम ही है। इंडिया शाइनिंग के रथ पर सवार होकर 2004 के चुनाव में उतरी भाजपा-एनडीए के साथ वाजपेयी को भी इसमें निराशा हाथ लगी और लगातार तीसरी पारी की राह नहीं खुली।

कांग्रेस के नेतृत्व में 2004 में चुनाव बाद संप्रग गठबंधन बना और प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की सरकार बनी, जिसने 2009 के चुनाव में लगातार दूसरी बार स्पष्ट जनादेश हासिल किया। 2014 में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए चुनाव में कांग्रेस-यूपीए भी लगातार तीसरी पारी से चूक गया और नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भाजपा अकेले दम पर बहुमत के साथ सत्ता में आयी। प्रधानमंत्री मोदी को 2019 के लगातार दूसरी बार स्पष्ट जनादेश मिला और दो पूर्ण कार्यकाल के बाद जब 2024 के चुनावी रण में उतरेंगे तो जाहिर तौर पर उनका लक्ष्य 62 साल से अब तक नहीं बदले रिवाज को बदलने पर होगा।

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