क्या जजों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद राजनीतिक पद स्वीकार करने चाहिए? क्या इससे उनकी निष्पक्ष न्यायमूर्ति की छवि प्रभावित नहीं होती है? ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब कयासों के रूप में हमारे और आपके बीच तैरते रहते हैं। इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ से मध्य प्रदेश के स्टेट एडिटर सतीश सिंह ने दिल्ली के 5 कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर खास बातचीत की। जस्टिस चंद्रचूड़ ने हर सवाल का खुलकर जवाब दिया। देश के किसी भी मीडिया संस्थान को साल 2024 में दिया गया यह उनका पहला इंटरव्यू है।
सवाल: कोर्ट की लंबी छुट्टियों पर अक्सर सवाल उठते हैं। क्या लंबी छुट्टियां होनी चाहिए?जवाब: कोर्ट से शाम 4 बजे जब हम उठते हैं, काम तो तब शुरू होता है। सोमवार या शुक्रवार को हर बेंच के सामने 60-70 मामले आते हैं। लोगों को लगता है कि मामला दो मिनट सुना और निपटारा हो गया। दो या पांच मिनट में डायलॉग करने के लिए भी हर जज एक केस को आधा घंटा और बड़े मामले में 3 घंटे तक पढ़ता है। शनिवार-रविवार को जज पेंडिंग फैसले लिखते हैं। रविवार को सोमवार को लिस्ट मामले पढ़ते हैं।
सफर में भी पढ़ते रहते हैं। इस साल छुट्टियों से पहले मेरे पास कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच के करीब 18 या 19 बड़े मामले थे। उनके साथ 176 कनेक्टेड केस थे। अब इन्हें पढ़ने और समझने का समय कब मिलेगा। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सामने कई बार ऐसे मामले होते हैं, जिन पर देश का भविष्य या दिशा निर्भर करती है। जजों को समय नहीं देंगे, तो वे ये काम कैसे करेंगे। सवाल: जज की नियुक्ति पर सरकार और कोर्ट में मतभेद की खबरें आती हैं।
