देश में भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन 19 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहारों के आगमन के साथ ही मिलावट खोर भी सक्रिय हो जाते हैं। थोड़ा सा मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की जान को खतरे में डाल देते हैं। मिलावटखोर नकली और केमिकल से बने रंगों वाली मिठाइयां बेचते हैं, जिसे खाने से पेट में इन्फेक्शन के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। जिसका असर हमारे लीवर, किडनी और हार्ट पर सीधा पड़ता है।
हुई छापेमार कार्रवाई
रक्षाबंधन के त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सक्रिय हो गया है। मिलावटी खाद्य बिक्री रोकने के लिए शनिवार को विभाग की टीम ने टिकैटगंज से बंदूी के लड्डू और पनीर, लालबाग से पनीर, निशातगंज से गुलाब जामुन और पनीर, जानकीपुरम से टमेटो सास, कानपुर रोड से छेना और पनीर, राजाजीपुरम से गुलाब जामुन, निराला नगर से मिल्क केक और बेसन समेत छेना मिठाई का सैंपल लिया। सभी 12 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
इस तरह पहचाने मिलावटी मिठाई
मिलावटी मिठाई को पहचाना आसान होता है। बस कुछ नियम पता होने चाहिए जैसे की-
-रंग-बिरंगी ले रहे हो तो पहले मिठाई को हाथ से मसलकर देखें। अगर मिठाई का रंग हाथ में रंग लग जाए तो मिठाई में रंग की मिलावट है।
-मावा को हाथों से रगड़े अगर उसे रगड़ने पर हाथ में घी नहीं निकलता है तो मावा नकली है।
-मावा को हाथ में लेकर उसका लड्डू बनाने का प्रयास करें। अगर मेवा नकली होगा तो वह फटने लगेगा।
-मिठाई पर लगा हुआ मावा अगर बहुत दानेदार है तो उसमें मिलावट की हो सकती है क्योंकि शुद्ध मावा एकदम चिकना होता है।
-कई मिठाईयों पर वरक का काम होता है। ऐसे में असली और नकली पहचानना जरूरी है। अगर वरक अगर असली है तो जलाने पर छोटा गोलीनुमा हो जाएगा। वहीं नकली वरक जले हुए ग्रे-कलर के कागज जैसा हो जाएगा।
-केसर की मिठाई भा मार्केट में काफी मिलती है। ऐसे में केसर की मिठाई का एक टुकड़ा पानी में डालें। अगर वह रंग छोड़ रहा है तो केसर असली है।
