बलरामपुर अस्पताल में डेंगू पीड़ित बच्चे की मौत के मामले में मां का कहना है कि वार्ड आया के इंजेक्शन लगाते ही उसके सांसे अटक गई थी। काफी मिन्नतों के बाद डॉक्टर देखने आए तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिजन की नाराजगी को देखते हुए आनन-फानन में बच्चे को आईसीयू में ले जाकर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया। कुछ देर बात मृत घोषित कर दिया गया।
हालांकि, परिजन के आरोप पर अस्पताल प्रशासन ने वार्ड आया को बर्खास्त करने के साथ ही ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग अफसर सहित तीन कर्मचारियों को निलंबित किया है। पूरे प्रकरण की जांच के लिए सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति ने पीड़ित परिजन और आरोपियों को बयान दर्ज कराने के लिए शनिवार को बुलाया है। परिजन ने शुक्रवार को बच्चे के शव को सिधौली ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक करा दिया।
मूलरूप से सिधौली सीतापुर निवासी इश्तियाक मड़ियांव इलाके के प्रीति नगर में परिवार के साथ रहते हैं। इश्तियाक के 12 वर्षीय बेटे जैद को कई दिनों से बुखार आने पर मंगलवार को बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में दिखाया गया था। जहां उसे बाल रोग विभाग में भर्ती कर लिया गया। खून की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। लेकिन प्लेटलेट्स कम नहीं हुए थे। पिता इश्तियाक के मुताबिक उसकी तबीयत में सुधार भी हो रहा था। इस बीच डॉक्टर ने बुधवार रात एक इंजेक्शन लिखा। कहा बाहर से लाकर उसे लगवा देना। इंजेक्शन लाकर देने पर बोतल में डालकर आधा इंजेक्शन चढ़ाया गया। स्टाफ ने कहा आधा इंजेक्शन सुबह लगेगा। इसके बाद बच्चा आराम से सो गया।
