पटना, 13 जुलाई 2025:
बिहार में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य की वोटर लिस्ट में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के नागरिकों के नाम दर्ज पाए गए हैं। यह प्रक्रिया 24 जून 2025 से पूरे राज्य में चल रही है।
कैसे हुआ खुलासा?
बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) ने जब घर-घर जाकर मतदाता जानकारी की पुष्टि शुरू की, तो कई लोगों के पास भारत की नागरिकता से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों में अवैध घुसपैठ के चलते वोटर लिस्ट में फर्जी नाम जुड़ गए थे।
क्या है SIR प्रक्रिया?
चुनाव आयोग ने 24 जून से 31 जुलाई तक वोटर लिस्ट का विशेष सत्यापन शुरू किया है।
1 अगस्त से संदिग्ध नामों की जांच और प्रमाणिकता की प्रक्रिया शुरू होगी।
30 सितम्बर को नई अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, जिसमें अवैध नामों को हटाया जाएगा।
किन जिलों में सबसे ज्यादा संदिग्ध नाम?
सीमावर्ती जिले जैसे अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में सबसे अधिक संदिग्ध मतदाता पाए गए हैं।
कुछ स्थानों पर बांग्लादेशी भाषा और दस्तावेज दिखाए जाने की रिपोर्ट है।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की है, जिसमें देशभर में वोटर लिस्ट की जांच की मांग की गई है।
दूसरी ओर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस प्रक्रिया को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है और आयोग पर धार्मिक-जातीय आधार पर मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
राजनीतिक तूफान
तेजस्वी यादव (RJD) ने बयान में कहा,
“सूत्र को हम मूत्र समझते हैं। चुनाव आयोग अब किसी पार्टी का सेल बन गया है।”
भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रहित में उठाया गया जरूरी कदम बताया।
चुनाव आयोग का बयान
“यह प्रक्रिया सभी राज्यों में हर कुछ वर्षों में होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के पास नागरिकता से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं हैं, तो उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा।”
निष्कर्ष:
बिहार में अवैध विदेशी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। आयोग की इस पहल से आने वाले विधानसभा चुनाव 2025 के पहले मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है।
यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी बन गया है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया पर देशभर की नजर है।
