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2 सीटों से 303 सीटों का सफर, 42 वर्षों में कैसी पनपी भाजपा

नई दिल्ली  (मानवीय सोच) 6 अप्रैल का दिन BJP अपने स्थापना दिवस के रूप में मनाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि वो बातें जो बीजेपी को देश की दूसरी पार्टियों से अलग बनाती हैं. बुधवार को बीजेपी का 42वां जन्मदिन है. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने तीन महत्वपूर्ण बातें कहीं. पहली ये कि इस देश में जिन पार्टियों को केवल एक परिवार चलाते हैं, उन्होंने दशकों तक भारत के लोगों के साथ विश्वासघात किया. दूसरी बात ये कि बीजेपी देश की अकेली ऐसी पार्टी है, जो लोगों को वोट बैंक की राजनीति के नुकसान समझाने में सफल रही है. तीसरी बात ये कि बीजेपी की कोशिश है कि वो आखिरी व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाए. ये कार्यक्रम दिल्ली में स्थित बीजेपी के राष्ट्रीय मुख्यालय में हुआ और इस दौरान 13 देशों के राजनयिक भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे और इन देशों में फ्रांस, इटली, Switzerland, Poland, सिंगापुर और बांग्लादेश जैसे देश प्रमुख हैं.

इस उद्देश्य से हुआ पार्टी का गठन

6 अप्रैल 1980 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी का गठन किया था. हालांकि बीजेपी एक विचार धारा के रूप में वर्ष 1951 में ही अस्तित्व में आ गई थी. उस समय राष्ट्रवाद की विचारधारा पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जन संघ की स्थापना की थी और वर्ष 1977 में Emergency समाप्त होने के बाद भारतीय जन संघ का जनता पार्टी में विलय हो गया था और इस विलय का कारण ये था कि ये सारी पार्टियां Emergency के बाद इंदिरा गांधी को हराना चाहती थीं.

2 सीटों से सबसे बड़ी पार्टी बनने का सफर

BJP ने अपना पहला लोक सभा चुनाव वर्ष 1984 में लड़ा था और तब उसे केवल 2 सीटों पर जीत मिली थी. ये बीजेपी के लिए बड़ी हार थी, क्योंकि उसने 224 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि इसके बाद बीजेपी ने जमीनी स्तर पर अपने संगठन को मजबूत करने का काम किया और अपनी स्थापना के केवल 16 वर्षों में वो देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई.

जब BJP ने बनाया NDA

वर्ष 1996 के लोक सभा चुनाव में उसे 161 सीटों पर जीत मिली थी और वो देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी. उस समय BJP ने गठबंधन सरकार का गठन किया था, जो सिर्फ 13 दिनों तक सत्ता में रही थी. इसके बाद वर्ष 1998 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली और कई दलों के साथ मिलकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA बनाया. लेकिन तब जयललिता की पार्टी AIADMK ने बीजेपी से अपना समर्थन वापस ले लिया था, जिससे ये सरकार भी 13 महीनों में गिर गई थी. हालांकि इन 13 महीनों में बीजेपी भारत के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई. क्योंकि इसी समय अवधि में भारत ने पोखरण में परमाणु परिक्षण किया था.

कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार

1999 में जब फिर से लोक सभा चुनाव हुए, तब बीजेपी ने 183 सीटें जीतीं थी और ये सरकार आजाद भारत के इतिहास में अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी. ये वही दौर था, जब भारत ने कारगिल में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा और इस युद्ध में विजय हासिल की. इस दौर में बीजेपी के पास अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे बड़े नेता थे. लेकिन फिर 2014 के लोक सभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और इन चुनावों में बीजेपी को 282 सीटों पर जीत मिली और बीजेपी को उसके इतिहास में पहली बार बहुमत हासिल हुआ. इसके बाद 2019 के लोक सभा चुनाव में भी बीजेपी ने 303 सीटें जीती थीं.

आंकड़ों से समझें BJP का राजनीतिक विस्तार

42 वर्षों में बीजेपी का कैसे-कैसे विस्तार हुआ, उसे आप इन आंकड़ों से समझ सकते हैं. वर्ष 1981 में बीजेपी के पास पूरे देश में सिर्फ 148 विधायक थे. लेकिन आज इनकी संख्या 1 हजार 296 है. 1984 में बीजेपी के पास सिर्फ 2 सांसद थे. लेकिन आज उसके पास 303 सांसद हैं. 1984 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी को एक करोड़ 89 लाख वोट मिले थे. लेकिन 2019 के लोक सभा चुनाव में उसे 22 करोड़ 89 लाख वोट मिले थे. आज बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है. बीजेपी के पास 17 करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ता हैं. जबकि चीन की Communist Party के पास 9 करोड़ 14 लाख कार्यकर्ता हैं.

इलेक्शन की मशीन है BJP?

बीजेपी को इलेक्शन की एक मशीन कहा जाता है. क्योंकि वो एक मशीन की तरह काम करती है. मशीन ना थकती है, ना छुट्टी लेती है और बिना रुके काम करती है. इसी तरह बीजेपी भी मशीन की तरह जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने के लिए काम करती है. बीजेपी ने असल में ये बताया है कि एक पार्टी के लिए संगठन और संगठन की ताकत क्या होती है.

पिछड़ों और गरीबों की पार्टी है BJP?

बीजेपी को अक्सर मिडिल क्लास, व्यापारियों और अमीरों की पार्टी माना जाता है. लेकिन इस समय पूरे देश में संसद में भी और विधान सभाओं में भी सबसे ज्यादा पिछड़े समुदाय के सांसद और विधायक बीजेपी के ही हैं. साथ ही बीजेपी जो योजनाएं लेकर आई है, वो भी पिछड़ों और गरीबों से जुड़ी हैं. जिससे कई बार अमीर और व्यापारी वर्ग उससे नाराज भी हो जाता है. लेफ्ट पार्टियों के बाद बीजेपी अकेले ऐसी पार्टी हैं, जो विचाराधारा पर आधारित है. जबकि बाकी पार्टियां परिवार की विचारधारा पर आधारित हैं. बीजेपी मुफ्तखोरी की राजनीति के खिलाफ भी रहती है और ये बात भी उसे बाकी पार्टियों से अलग बनाती है.

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