वाराणसी (मानवीय सोच) ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष के मुख्य अधिवक्ता अभयनाथ यादव (उम्र 60 वर्ष) का रविवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। अपनी दलीलों की वजह से वह लगातार चर्चा में बने हुए थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक उन्हें सुबह से बेचैनी महसूस हो रही थी। रात करीब 10.30 बजे सीने दर्द उठा। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
अभय नाथ यादव वाराणसी के पांडेयपुर नई बस्ती के निवासी थे। पिछले 35 वर्षों से वकालत कर रहे थे। वह तीन वर्ष से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से पैरवी कर रहे थे। दीवानी न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अभयनाथ यादव काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी प्रकरण में दलीलों के लिए जाने गए।
वह प्रकरण से जुड़े सभी केसों में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से पैरवी करते थे। वर्तमान में भी वह विभिन्न अदालतों में मूलवाद, शृंगार गौरी सहित करीब आधा दर्जन केस की पैरवी कर रहे थे। शृंगार गौरी मामले में उनकी दलीलें चर्चा में रहीं। ज्ञानवापी प्रकरण में शृंगार गौरी मेरिट केस में पर उन्हें चार अगस्त को कोर्ट में जवाब देना था।
मुस्लिम पक्ष से अदालत में वह अकेले दलीलें देते रहे। वह मिलनसार होने के साथ वाकपटु भी थे। केवल ज्ञानवापी ही नहीं, विभिन्न मुकदमों में दलीलों के कारण अधिवक्ता समाज में उनका सम्मान था। निधन की जानकारी पर रात में उनके आवास पर अधिवक्ताओं व विभिन्न समाज के लोग पहुंचने लगे। इसी वर्ष 21 जून को उन्होंने अपनी एक बेटी की धूमधाम से शादी की थी।
केस की तैयारियों को झटका
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के सचिव एमएस यासीन सईद ने कहा कि अभयनाथ के असमय जाने से न केवल इस केस को झटका लगा है बल्कि एक वरिष्ठ साथी अधिवक्ता का साथ छूट गया है। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। अब चार अगस्त को मुस्लिम पक्ष को अदालत में अपना प्रत्युत्तर पेश करना है।
अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने बताया कुछ दिन पहले जिला जज की अदालत में बहस पूरी करने के बाद मुझसे रुद्राक्ष की माला पहनने की इच्छा प्रकट की थी। दिवंगत अधिवक्ता अभयनाथ यादव के शोक संतप्त परिवार में पत्नी, बेटा और दो बेटियां हैं।
वाराणसी की अदालत ने दिया था ज्ञानवापी के सर्वेक्षण का आदेश
बता दें कि वाराणसी की एक अदालत ने ज्ञानवापी परिसर की ‘वीडियोग्राफी’ कर सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था और हिंदू पक्ष ने इस दौरान एक शिवलिंग मिलने का दावा किया था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि वह ढांचा वजू खाना में मौजूद फव्वारे का हिस्सा है।
