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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 51 मुकदमों की सीबीआई जांच के आदेश दिए

प्रयागराज   (मानवीय सोच)  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूं ही 51 मुकदमों की जांच करने के लिए सीबीआई को नहीं कहा है। इन मुकदमों में रेप, गैंगरेप, हत्या, लूट, डकैती, मारपीट और एससी-एसटी की धाराएं लगी हैं। सिर्फ मऊआइमा में ही गैंगरेप समेत 36 मुकदमे दर्ज हैं।

इसके अलावा कीडगंज, शिवकुटी, कर्नलगंज, बहरिया, दारागंज और फाफामऊ थाने में विभिन्न मुकदमे दर्ज हैं, जिनकी सीबीआई जांच करेगी। शुक्रवार को ‘हिन्दुस्तान’ ने पड़ताल की तो पता चला कि गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराने के बाद रेप पीड़िताएं अपने बयान से मुकर गई हैं।

इसके पीछे ब्लैकमेलिंग या कोई दूसरा कारण था, पुलिस की जांच में सामने नहीं आया है। गैंगरेप का एक मुकदमा दारागंज थाने में दर्ज हुआ था जिसमें दो वकील आरोपी थे। इसी मुकदमे की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 51 ब्लैकमेलिंग से जुड़े मुकदमों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। हैरानी की

बात यह है कि इस मुकदमे की पीड़िता को पता भी नहीं था और उसके नाम से गैंगरेप की एफआईआर दर्ज हो गई थी। इसी तरह गैंगरेप के अन्य मुकदमे में एफआईआर दर्ज कराने के बाद आरोपी जेल गया, लेकिन बाद में उसे पीड़िता ने बरी कराया। सीबीआई जांच के आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है। फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के पीछे वकीलों का एक रैकेट बताया गया है।

एक महिला ने मई 2021 में दारागंज थाने में दो वकील व अन्य के खिलाफ गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस को बताया कि उसकी 13 साल की बेटी को मदद के लिए दारागंज
में बुलाया। कार में बैठाकर नशीला पदार्थ खिलाया और गैंगरेप किया। पीड़िता ने कोर्ट में बयान दिया कि उसकी मां ने फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था।

22 करोड़ 37 लाख के गबन का मामला

एक्सिस बैंक सिविल लाइंस शाखा में 22 करोड़ 37 लाख रुपये गबन का मामला सामने आने पर मार्च 2017 में सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज हुआ था। उस वक्त बैंक के अफसर और शुआट्स के एकाउंटेंट पर केस दर्ज हुआ था। एसआईटी ने शुआट्स के पदाधिकारियों पर भी आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में लखनऊ सीबीआई ने फरवरी 2021 में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।

अपर निजी सचिव भर्ती में धांधली

अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती 2010 में धांधली पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और वर्तमान में पीडब्ल्यूडी के विशेष सचिव आईएएस प्रभुनाथ के खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली में केस दर्ज किया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, साजिश के तहत ठगी और फर्जीवाड़ा की धाराओं में पिछले साल अगस्त में मुकदमा दर्ज किया गया। इस केस की जांच अभी लंबित है।

पीसीएस भर्ती 2015 में धांधली का आरोप

पीसीएस 2015 परीक्षा में धांधली का आरोप लगा था। सत्ता बदलने के बाद ही शासन ने इस केस की सीबीआई जांच कराने का आदेश दे दिया था। 21 नवंबर 2017 को केंद्र सरकार के कार्मिक व पेंशन मंत्रालय ने आयोग की सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी की थी। 5 मई 2018 को पीसीएस 2015 परीक्षा में अनियमितता को लेकर सीबीआई के दिल्ली मुख्यालय में एफआईआर दर्ज की गई थी।

पांच लोगों पर गैंगरेप, लेकिन बदल गई कहानी

मऊआइमा में 2021 में एक महिला ने गांव के बबलू समेत पांच लोगों के खिलाफ गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया। बाद में कहानी बदल गई। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। गैंगरेप के मुकदमे में पुलिस फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है।

रेल अफसर के खिलाफ एक करोड़ गबन का मुकदमा

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में तैनात सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) के खिलाफ सीबीआई ने जुलाई 2021 में करीब एक करोड़ रुपये गबन मामले में केस दर्ज किया था। पिछले साल कुछ रेल कर्मचारियों के खाते में अधिक रुपये भेजने का मामला सामने आया था। विभागीय जांच में यह तथ्य सामने आया कि करीब एक करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई थी।

हाईकोर्ट में फर्जी वकालतनामा का केस

शुआट्स के कुलपति आरबी लाल समेत चार के खिलाफ फरवरी 2021 में सीबीआई ने लखनऊ में केस दर्ज किया था। सीबीआई ने कैंट थाने में दर्ज 16 जून 2017 के मुकदमे को आधार बनाया था। आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट में फर्ची याचिकाएं कर उनका भुगतान किया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर फर्जीवाड़ा करने वालों पर केस दर्ज हुआ था।

बैंक ऑफ इंडिया में 4.25 करोड़ का गबन

बैंक ऑफ इंडिया धूमनगंज शाखा के करेंसी चेस्ट से 4.25 करोड़ रुपये हड़पे जाने के मामले में सीबीआई ने जनवरी 2021 में मुकदमा दर्ज किया था। इसमें बैंककर्मी वशिष्ठ कुमार राम और दो बिल्डर एसके मिश्रा व संजू मिश्रा को आरोपित किया है। आरोप था कि चेस्ट इंचार्ज ने करेंसी ग्रामीण बैंकों को पहुंचाने की जगह परिचितों और रिश्तेदारों को ब्याज पर दे दी थी।

कारनामा ढाई हजार में रेप, पांच हजार में गैंगरेप का केस

असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव को ब्लैकमेलिंग और फर्जीवाड़ा करने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मदन के सहयोगी ने फूलपुर थाने में एक महिला को ढाई हजार रुपये देकर रेप केस के गवाह के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद फूलपुर थाने में पांच हजार रुपये एक महिला को देकर गैंगरेप का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। इसका खुलासा पुलिस की जांच में हुआ था।

आधा दर्जन मामलों की सीबीआई कर रही जांच
सीबीआई राजूपाल हत्याकांड, महंत नरेंद्र गिरि की मौत और सिविल लाइंस में सर्राफ की हत्या की जांच पूरी कर चुकी है। इसके बाद भी अभी आधा दर्जन मुकदमों की जांच लंबित है। देवरिया जेल कांड में अतीक का बेटा अभी फरार है। अब 51 मुकदमों की जांच का आदेश हुआ है। ये हैं सीबीआई के लंबित मुकदमे…।

मऊआइमा में फर्जी मुकदमे से आम लोग हैं परेशान
मऊआइमा में दर्ज हो रहे फर्जी मुकदमे की कुछ माह पहले ही वहां के स्थानीय लोगों ने एसएसपी और एडीजी से मिलकर शिकायत की थी। मऊआइमा के पीड़ित दुकानदार मोबिन ने बताया कि उसने एक प्रॉपर्टी के लिए एक लाख रुपये दिया था। अब रुपये मांगने पर उसे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है। इसी तरह दुकानदार मो. शमशेर ने बताया कि एक जमीन लेने के लिए साढ़े तीन लाख में सौदा हुआ।

उसने दो लाख 70 हजार रुपये दे दिया। लेकिन जमीन नहीं मिली। रुपये मांगने पर एक मुकदमा दर्ज करा दिया। एक महिला की तहरीर पर छेड़खानी की दूसरी एफआईआर दर्ज करा दी। इसी तरह एक शिक्षक के खिलाफ मारपीट की एफआईआर दर्ज कराकर उसे परेशान कर रहा है। आरोप है कि शातिर महिला के साथ मिलकर अब तक 11 मुकदमा दर्ज करा चुका है।

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