लखनऊ (मानवीय सोच) राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले पैसे के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए सरकार ने नगर निकायों पर सख्ती करने का फैसला किया है। आयोग से मिलने वाली धनराशि को मनमाने तरीके से खर्च करने पर लगाम लगा दी गई है। साथ ही आयोग की धनराशि के खर्च करने में अनियमितता की शिकायत मिलने पर डीएम के स्तर से जांच कराने का भी फैसला किया गया है। डीएम की जांच रिपोर्ट के आधार जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
इस संबंध में निदेशक स्थानीय निकाय नेहा शर्मा ने राज्य वित्त आयोग के पैसों को खर्च करने के संबंध में सभी नगर निकायों को दिशा-निर्देश भेजा है। जिसमें राज्य वित्त आयोग से होने वाले कामों व खर्च का डीएम को लगातार अनुश्रवण करने को कहा गया है। इसमें किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर इसकी जांच कराते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
निदेशक की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पूर्ववर्ती ग्राम पंचायतों द्वारा कराए गए कामों के भुगतान में दोहराव न होने पाए। नई नगर पंचायतों में राज्य वित्त आयोग का पैसा प्रशासक व अधिशासी अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से खर्च किए जाएंगे। प्रशासक नियुक्त न होने वाले निकायों में प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय व अधिशासी अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से इस पैसे को खर्च किया जाएगा।
वहीं, पंचम राज्य वित्त आयोग से निकायों को 673 करोड़ रुपये जारी करते हुए निदेशक ने इस धनराशि को भी निर्धारित मदों में ही खर्च करने को कहा है। वेतन व अन्य अधिष्ठान व्यय के लिए ई.वेतन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। नए निकायों में कार्यालय की स्थापना व अन्य मूलभूत जरूरतों की पूर्ति के लिए इसे खर्च किया जाएगा। इसके अलावा पेयजल व्यवस्थाए सालिड वेस्ट मैनेजमेंटए वायु गुणवत्ता सुधार के कामों पर खर्च किया जाएगा।
