नई दिल्ली (मानवीय सोच) एक तरफ कांग्रेस विपक्षी एकता को लेकर जोर लगा रही है तो दूसरी तरफ एनसीपी चीफ शरद पवार बार-बार इससे दूर होते दिख रहे हैं. हालांकि उन्होंने खुले तौर पर ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है, लेकिन जिस तरह से वह विपक्ष के उठाए हर मुद्दे से किनारा करते दिख रहे हैं, उससे ये साफ नहीं हो पा रहा है कि उनकी असल मंशा क्या है? खास बात ये है कि ऐसा पहली बार नहीं है. शरद पवार पहले भी कांग्रेस का साथ उन हालातों में छोड़ चुके हैं, जब-जब गांधी परिवार के किसी सदस्य में राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने की संभावनाएं दिखी हैं. सवाल ये है कि क्या एक बार फिर शरद पवार ऐसे ही किसी इतिहास को दोहराने वाले हैं
महाराष्ट्र की राजनीति से निकल कर दिल्ली के तख्त तक की हवा में कुछ ऐसे ही सवाल घुले हुए हैं. सवाल है कि एनसीपी चीफ शरद पवार का विपक्षी एकता को लेकर असल रुख क्या है? उनके हर रोज आ रहे अलग-अलग बयानों से कांग्रेस की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं कि शरद पवार ऐसे नाजुक वक्त में क्या सोच रहे हैं
