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पेपर लीक मामले में बोले सीएम योगी

पेपर लीक अथवा सॉल्वर गैंग जैसी अराजक गतिविधियों पर अंकुश लगाए जाने के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कठोर कानून यथाशीघ्र लाए जाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस तरह के अपराध में संलिप्त हर अपराधी के खिलाफ ऐसी कठोरतम कार्रवाई की जाए, जो नजीर बने। उन्होंने कहा कि चयन आयोगों को परीक्षा से पूर्व, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद शासन स्तर के शीर्ष अधिकारियों तथा एसटीएफ के संपर्क में रहना चाहिए।मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक के बाद विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया तेज करने के लिए शनिवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न चयन आयोगों के अध्यक्षों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान चयन प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार पर जोर दिया, साथ ही चयन प्रक्रिया की समयबद्धता तय करने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि पेपर सेट करने की प्रक्रिया, उनकी छपाई, कोषागार तक पहुंचाने, कोषागार से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने, परीक्षा केंद्र की व्यवस्था, परीक्षा के बाद ओएमआर आयोग तक पहुंचाने ओएमआर की स्कैनिंग, परिणाम तैयार करने सहित पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग एजेंसियों को उनका भलीभांति रिकॉर्ड जांच करने के बाद दायित्व दें। हर पाली में 02 या अधिक पेपर सेट जरूर होने चाहिए। हर सेट के प्रश्नपत्र की छपाई भी अलग-अलग एजेंसी का माध्यम से करायी जानी चाहिए। तलाशी लेने के लिए महिला कर्मियों की तैनाती जरूर हो।

योगी ने चयन आयोगों से उम्मीद जतायी कि वे भर्ती परीक्षाओं के लिए कैलेंडर समय से जारी करें। कैलेंडर के अनुसार परीक्षा न होने से अभ्यर्थियों को असुविधा होती है। एक दिन में एक ही परीक्षा आयोजित की जाए, ऐसा होने से सुविधा रहेगी। यदि एडेड कॉलेज को सेंटर बनाया जाता है तो संबंधित प्रबंधक परीक्षा व्यवस्था में कहीं से भी शामिल न हो। केंद्र व्यवस्थापक के रूप में दूसरे संस्थान के प्रधानाचार्य को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को भी व्यवस्था से जोड़ें। गड़बड़ी हुई तो इनकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। योगी के अनुसार तमाम पदों के लिए शैक्षिक अर्हता निर्धारण में समकक्ष योग्यता के संबंध में विसंगतियों की सूचना मिली है। ऐसे प्रकरणों का समाधान कर आयोग को सही जानकारी दी जाए। चयन परीक्षाओं के केन्द्र के लिए राजकीय माध्यमिक, डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज अथवा साफ-सुथरे ट्रैक रिकॉर्ड वाले शैक्षिक संस्थान ही सेंटर बनाए जाएं। सीसीटीवी से लैस सभी परीक्षा केंद्र शहरी क्षेत्र में ही हों और इसे तय करते वक्त महिलाओं और दिव्यांगों की सुविधा का ध्यान रखा जाए।

 

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