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शराबी होने के बात जानते हुए भी प्रबंधन ने सौंप दी बस की चाबी, हादसे में मौत की नींद सो गए आठ मासूम

आठ बच्चों के लिए यम वाहन बनी स्कूल बस के चालक धर्मेंद्र ने शराब पी रखी थी जिसके चलते ही हादसा हुआ। जबकि जीएल पब्लिक स्कूल कनीना के प्रबंधन से जुड़े लोगों को पता था कि चालक शराब पीने का लती है। इसके बाद भी बस की चाबी सौंप दी।

स्कूल संचालक ने स्विच ऑफ किया मोबाइल

यदि प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी समझता तो हादसे में आठ बच्चों की जान नहीं जाती और 37 बच्चे घायल नहीं होते। इस घटना के लिए स्कूल प्रबंधन से लेकर आरटीए भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।

वह भी आंख बंद किए बैठे रहे और नियमों को ताक पर रख मौत की बस सड़क पर दौड़ती रही। घटना के बाद स्कूल संचालक ने अपने मोबाइल का स्विच बंद कर लिया है। अधिकारी भी जांच की बात कह कुछ कहने से बच रहे हैं।
हादसा बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे हुआ। धनौदा और झाड़ली गांव में बच्चों के लेने से पहले चालक गांव खेड़ी पहुंचा था। ग्रामीण अशोक तथा सुनील ने बताया कि वह चालक ठीक से बात भी नहीं कर पा रहा था। कुछ युवकों ने उससे चाबी भी छीन ली थी।

धर्मेंद्र ने नौकरी जाने की बात कह माफी मांगी तो उसे चाबी दे दी गई थी। वहां से वह बस लेकर चला तो गति अधिक होने तथा दिमाग सही नहीं होने पर उसने कनीना के महिला महाविद्यालय के पास मोड़ होने पर उसने बस से नियंत्रण खो दिया और पेड़ से टकरा बस पलट गई।

बस में शीशों के पास सेफ्टी राड नहीं होने के चलते जब बस पलटी तो शीशे टूटने से आठ से दस बच्चे बस से आकर गिर गए और बस के नीचे दबने से आठ की मौत हो गई। हादसे के बाद चालक बस से कूद कर भाग गया।

नियम ताक पर
यह बस 10 अप्रैल 2015 को आरटीए महेंद्रगढ़ कार्यालय से पंजीकृत हुई थी। इसकी फिटनेस अवधि 23 अगस्त 2018 तक वैध थी। इसके बाद फिटनेस नहीं कराई गई। आरटीए की ओर से भी कोई कदम नहीं आए गए।

बस का इंश्योरेंस 30 अगस्त 2017 को खत्म हो चुका है, जिसे आज तक रिन्यू नहीं कराया गया है। टैक्स भी 2017 तक ही भरा हुआ है। इसके अलावा बस का प्रदूषण सर्टिफिकेट भी 18 मार्च 2024 में समाप्त हो चुका है।

नहीं लगी थी सेफ्टी राड
स्कूल बस में छोटे बच्चे सवार होते हैं। ऐसे में बस में शीशों के साथ सेफ्टी राड लगानी अनिवार्य होती है। इस बस में राड नहीं लगी होने से शीेशे टूटने के बाद बच्चे बाहर गिरे और मौत का शिकार हो गए।

बस में प्राथमिक चिकित्सा बाक्स भी नहीं था। चालक के अलावा सुरक्षा गार्ड या सहायक भी नहीं था। जबकि यह अनिवार्य होता हैं। चालक और सहायक का मोबाइल नंबर भी नहीं दर्ज था।

दिखावे के लिए होती है बैठक
सुरक्षित यातायात को लेकर हर माह उपायुक्त की अध्यक्षता में मासिक बैठक होती हैं। जिसमें सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य एसडीएम, आरटीए तथा अन्य अधिकारी शामिल होते हैं।

बैठक में स्कूल बसों के फिटनेस को लेकर तय मापदंडों को लागू करने के लिए निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन हादसे के बाद निर्देश कागजी साबित हो रहे हैं। घटना को लेकर जिम्मेदार अधिकारी बयान देने से भी बच रहे हैं।

घटना पर गृहमंत्री सहित कई नेताओं ने शोक जताया
हादसे को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिए मैसेज पर शोक जताते हुए कहा प्रशासन द्वारा घायल बच्चों को सहायता दी जाएगी और जांच की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेसी नेता कुमारी सैलजा सहित कई नेताओं ने शोक जता घटना की जांच करने की मांग की है।

घायलों को देखने पहुंची शिक्षा मंत्री
हादसे में घायल कई बच्चों को रेवाड़ी के एक प्राइवेट अस्पताल में लाया गया। उन्हें देखने के लिए प्रदेश की शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा पहुंची। स्वजन को सात्वंना देते हुए उन्होंने उपायुक्त को जांच कर दोषी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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