लखनऊ (मानवीय सोच) भारत व दक्षिण कोरिया के प्राचीन संबंधों पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनेगी। दक्षिण कोरिया से आए प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में इसका प्रस्ताव रखा है। प्रदेश सरकार ने सहयोग का भी आश्वासन दिया है। इस वृत्तचित्र के जरिए रानी हो की गाथा पूरे विश्व में प्रसारित करने की योजना है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल ग्लोबल डिप्लोमेट्स क्लब के सीईओ जेना चुंग और इन्वेस्टर डेटा सेंटर एंड डिफेंस प्रोजेक्ट्स हक्के रत्ना सोमवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने रामलला, हनुमानगढ़ी और कनक भवन मंदिर में दर्शन पूजन किया। सरयू तट पर स्थित भारत-कोरिया के मधुर संबंधों का गवाह कोरिया पार्क को भी देखा।
डेलिगेशन के साथ अयोध्या पहुंचीं जिया मंजरी ने बताया कि अयोध्या में बन रहे भव्य राममंदिर का भी दर्शन किया गया है। राममंदिर बनने से अयोध्या विश्व पर्यटन के क्षितिज पर तेजी से स्थापित होती दिख रही है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोरियाई प्रतिनिधिमंडल को राममंदिर निर्माण कार्य के बारे में जानकारी दी गई।
जिया ने बताया कि हमारी टीम दक्षिण कोरिया से इन्वेस्टर समिट में शामिल होने आई थी। हमने समिट में भारत-कोरिया के प्राचीन संबंधों पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के लिए प्रस्ताव रखा है। सरकार ने इसमें पूरा सहयोग का आश्वासन दिया है। यह फिल्म रानी हो की अयोध्या से कोरिया यात्रा पर आधारित होगी। अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना किस तरह कोरिया पहुंची। सूरीरत्ना से उनके रानी हो बनने का पूरा वृतांत दर्शाया जाएगा। कहा कि इस फिल्म के जरिए कोरिया व अयोध्या के मधुर संबंधों से भी पूरी दुनिया परिचित हो सकेगी। अयोध्या राजपरिवार से संबंधो की पूरी कहानी भी दर्शायी जाएगी। इसके लिए दक्षिण कोरिया सरकार की ओर से पिछले साल एक टीम अयोध्या आकर कोरिया पार्क सहित यहां के प्रमुख स्थलों की वीडियोग्राफी भी कर चुकी है।
2001 में हुई थी कोरियन पार्क की स्थापना
अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना कोरिया की महारानी बनीं थी। उनकी स्मृति में ही वर्ष 2001 में कोरियन सरकार द्वारा सरयू तट पर क्वीन हो मेमोरियल पार्क की स्थापना की गई थी। हर वर्ष कोरियाई टीम अयोध्या आकर महारानी हो को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। कोरिया व भारत सरकार ने मिलकर सरयू तट पर स्थित रानी हो मेमोरियल पार्क का विस्तारीकरण 21 करोड़ की लागत से कराया है।
कोरिया में है महारानी हो के 60 लाख वंशज
अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना दो हजार वर्ष पूर्व दैवीय संदेश पाकर सुदीर्घ जलयात्रा से दक्षिण कोरिया पहुंची थी। जहां उनका विवाह राजा सूरो से हुआ और फिर उनका नाम रानी हो कर दिया गया। आज भी कोरिया में करक गोत्र के तकरीबन 60 लाख लोग स्वयं को राजा सूरो और अयोध्या की राजकुमारी का वशंज मानते हैं। अयोध्या के शाही परिवार और कोरिया के करक राजवंश का प्रतीक चिह्न एक समान है और ये हैं दो मछलियां।
