लखनऊ (मानवीय सोच) पुलिस महकमे में इस बार आईजी से एडीजी के पद पर नए वर्ष में होने वाली पदोन्नति में दिक्कत आएगी। क्योंकि एडीजी रैंक में पहले से अफसरों की संख्या ज्यादा है। प्रदेश में एडीजी काडर में पदों की संख्या 21 है। लेकिन वर्तमान में 50 एडीजी प्रदेश में कार्यरत हैं। दो एडीजी स्टडी लीव पर हैं और इस वर्ष के अंत तक दो अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी कर लौट रहे हैं। ऐसे में अगले साल एडीजी के पद पर अफसरों की पदोन्नति हो पाएगी या नहीं, इसे लेकर संशय है।
एडीजी के काडर पोस्ट की संख्या के बराबर एक्स काडर पोस्ट पर नियुक्ति का प्रावधान है। ऐसे में अधिकतम 42 अधिकारी ही एडीजी रैंक के रह सकते हैं। ऐसे में आठ एडीजी पहले से ही अतिरिक्त हैं। हालांकि एडीजी सीबीसीआईडी दावा शेरपा और एडीजी प्रयागराज प्रेम प्रकाश 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। अगर केंद्रीय गृह मंत्रालय व केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने हस्तक्षेप नहीं किया तो 1998 बैच के अफसरों को एडीजी बनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
इस बैच में जो अधिकारी हैं उसमें आईजी इंटेलीजेंस भगवान स्वरूप, आईजी पीएसी पश्चिमी जोन अमित चंद्रा, लखनऊ में संयुक्त पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया, पुलिस मुख्यालय में एडीजी एसके भगत, गृह विभाग में सचिव बीडी पाल्सन, आईजी वाराणसी रेंज के सत्यनारायण और भर्ती बोर्ड में तैनात आईजी पद्मजा चौहान का नाम शामिल हैं।
