लखनऊ (मानवीय सोच) ई-स्टांप व्यवस्था लागू होने से 5,783 करोड़ रुपये के भौतिक स्टांप बेमतलब हो गए हैं। इनकी बिक्री बंद होने से इनके नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है। खास बात ये है कि इन भौतिक स्टांप की छपाई व परिवहन पर करीब 6.53 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह रकम भी बट्टे खाते में जाने की नौबत है।
सूत्रों ने बताया प्रदेश के कोषागारों में 5,999 करोड़ रुपये के भौतिक स्टांप उपलब्ध हैं। इनमें 5000 रुपये तक के मूल्य वर्गों के स्टांप की बिक्री स्टांप वेंडर के माध्यम से की जा रही है। 5000 रुपये से अधिक मूल्य वर्ग के भौतिक स्टांप की बिक्री ई स्टांपिंग प्रणाली लागू होने के बाद से नहीं की जा रही है।
5000 रुपये से अधिक मूल्य वर्ग के भौतिक स्टांप का कुल मूल्य 5,783 करोड़ रुपये है। कोषागार से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि भौतिक स्टांपों का निस्तारण जल्द नहीं कराया गया तो उनके नष्ट होने की आशंका बनी रहेगी। शासन के समक्ष यह विषय पिछले वर्ष से उठाया जा रहा है लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।
