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दिल्‍ली-NCR से लेकर यूपी तक भूकंप के झटके ; 6.3 तीव्रता से डोली धरती

नई दिल्‍ली:  (मानवीय सोच)  देर रात भूकंप के झटकों से दिल्‍ली-एनसीआर में दहशत फैल गई। 9 नवंबर की रात करीब 1.57 बजे झटके लगे। राजधानी से लेकर नोएडा, गुड़गांव, गाजियाबाद और अन्‍य इलाकों में भी झटके महसूस किए गए। रात को सर्द मौसम की वजह से बंद पंखे अचानक हिलने लगे। खिड़कियां कड़कड़ाने लगीं। फर्निचर इधर-उधर होने लगा। सोशल मीडिया पर लोग झटकों के अनुभव बता रहे हैं। नैशनल सेंटर फॉर सीस्‍मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र नेपाल में था। अपने ट्वीट में NCS ने कहा कि भूकंप की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी। भूकंप के झटके उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में भी महसूस हुए। नेपाल में 8 नवंबर को 9.41 बजे और 8.52 पर भी भूकंप आया था। हालांकि उनकी तीव्रता 5 से कम थी।

1 नवंबर को एमपी में लगे झटके
मध्यप्रदेश के जबलपुर और आसपास के जिलों में 1 नवंबर की सुबह 8:43 बजे 4.3 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के कारण जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली। आईएमडी के वैज्ञानिक वेद प्रकाश ने बताया कि इसका केंद्र डिंडोरी के पास 10 किमी की गहराई में था।

आधी दुनिया कुदरती खतरों से निपटने को तैयार नहीं
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आधी दुनिया अभी तैयार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की एक हाल‍िया रिपोर्ट में इस बारे में चिंता जाहिर की गई थी। इसके मुताबिक, दुनिया के आधे देशों में मल्टी हेजर्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम नहीं लगे हैं। ये सिस्टम कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं की पहले ही जानकारी देने में सक्षम होते हैं।

भारत में कैसा सिस्टम
भारत सरकार दावा करती है कि देश में अत्याधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम काम कर रहे हैं। यह सिस्टम बाढ़ और साइक्लोन के बारे में सही आकलन कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग को अमेरिकी मदद से बाढ़ की 6 से 24 घंटे पहले ही जानकारी मिल जाती है।

अर्ली वॉर्निंग सिस्टम आपदाओं के बाद होने वाले खतरों की चेतावनी भी जारी करता है। मसलन भूकंप के बाद आने वाली सूनामी या फिर लैंड स्लाइड। कुछ सिस्टम एक आपदा के लिए काम करते हैं जैसे बाढ़ या चक्रवात। लेकिन जिस तेजी से तीव्र मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में मल्टी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम में निवेश की जरूरत है। जिससे कि एक ही सिस्टम से ज्यादा से ज्यादा आपदाओं की जानकारी मिल सके।

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