लखनऊ (मानवीय सोच) केजीएमयू में डॉक्टर से परामर्श भले ही एक रुपये के पर्चे पर मिल जाता हो, लेकिन पीपीपी मॉडल पर पैथालॉजी जांच की व्यवस्था मरीजों की जेब काट रही है। यहां कई जांचें निजी मेडिकल कॉलेजों एरा और इंटीग्रल से भी महंगी हैं। यह स्थिति तब है जब चिकित्सा संस्थान को सरकार से औसतन एक हजार करोड़ रुपये सालाना अनुदान मिलता है।
केजीएमयू में पैथालॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोडाग्यनोसिस की जांच काफी हद तक पीपीपी आधार पर निजी एजेंसी से करवाई जाती है। केजीएमयू और एजेंसी में करार के अनुसार मिलने वाली टेस्ट फीस में दोनों का हिस्सा बराबर-बराबर है। जानकारों के अनुसार इसी कारण जांचों के दाम काफी ज्यादा हैं।
उधर, एरा और इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज जैसे निजी संस्थान भी केजीएमयू के मुकाबले सस्ती दर पर जांचें कर रहे हैं। इससे जाहिर है कि केजीएमयू में जांच के दाम काफी हद तक कम किए जा सकते हैं।
