अमेठी (मानवीय सोच) आप यकीन नहीं करेंगे कि सरकार एक बच्चे की पढ़ाई पर 15 हजार रुपये से अधिक खर्च कर रही है फिर भी उनका शैक्षिक स्तर शून्य है। ये तो छोड़िए कंपोजिट ग्रांट भेजने के बाद भी स्कूल के शौचालय की स्थिति प्रयोग करने लायक नहीं है। वहीं कायाकल्प के तमाम दावों के बावजूद रनिंग वाटर और साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।
शनिवार को जब बीएसए संगीता सिंह ने प्राथमिक विद्यालय पूरे रघुनाथ सिंह का निरीक्षण किया तो उनका सच से सामना हुआ। स्कूल में कार्यरत अध्यापिका रेनू कुमारी स्कूल आई हुई थी। स्कूल परिसर में सिर्फ चार बच्चे टहलते मिले। रजिस्टर पर अंकन 14 बच्चों का था। एमडीएम बनाने के संसाधन जरूर थे लेकिन बनाने का काम नहीं शुरू हुआ था। स्कूल का शौचालय झाड़ झंखाड से पटा दिखा। स्कूल में रनिंग वाटर और हैंडवाश यूनिट का भी कोई इंतजाम नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि सहायक अध्यापिका रेनू कुमारी अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह से उदासीन हैं और कभी-कभार ही स्कूल आती हैं।
बीएसए ने अध्यापिका को कड़ी फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं में सुधार लाए जाने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक विद्यालय बछिलाही का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सहायक अध्यापिका रिया पांडे अनुपस्थित पाई गई। प्राथमिक विद्यालय सैंठा के निरीक्षण में इंचार्ज प्रधानाध्यापक दिव्या श्रीवास्तव अनुपस्थित पाई गई। यहां भी छात्र संख्या काफी कम रही। रनिंग वाटर के साथ ही पेयजल की टोटी टूटी थी। बीएसए ने कहा कि सभी लापरवाह अध्यापकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
