नई दिल्ली : (मानवीय सोच) समान नागरिक संहिता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो टूक बयान के बाद अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस पर जल्दी ही आगे बढ़ेगी. राजनीतिक दलों में इसे लेकर हलचल तेज हो गई है. विधि आयोग को अब तक साढ़े आठ लाख से अधिक सुझाव मिल चुके हैं.
सवाल है कि क्या सरकार राज्य सभा में समान नागरिक संहिता के बिल को पारित करा सकती है, जहां उसे बहुमत नहीं है. दूसरा सवाल यह भी है कि दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग पर लाए अध्यादेश का राज्य सभा में क्या होगा? दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों ही बिलों में सबसे अहम भूमिका आम आदमी पार्टी (AAP) की रहेगी.
पहले बात समान नागरिक संहिता की. राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार ने तीन तलाक और अनुच्छेद 370 के खात्मे करने जैसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद बिल पारित कराए हैं. इसलिए यह समझना आसान है कि सरकार अगर चाहे तो वह राज्यसभा में समान नागरिक संहिता बिल भी पारित करा सकती है.
