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नेपाल में तटबंध के लिए भारत देगा 10.5 अरब रुपये

श्रावस्ती  (मानवीय सोच)  श्रावस्ती स्थित कलकलवा-लक्ष्मनपुर बैराज हमेशा नेपाल के निशाने पर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेपाल हमेशा आरोप लगाता रहा कि इस बैराज की वजह से नेपाल में राप्ती नदी भीषण तबाही करती है। अब लंबे समय बाद भारत सरकार ने संबंध सुधारने की कोशिश की है। इसके तहत भारत ने नेपाल क्षेत्र में भी होलिया के पास राप्ती नदी पर तटबंध बनाने के लिए सहमति दे दी है। साथ ही इसके लिए 10.5 अरब रुपये देने की मंजूरी भी दी है। इस मसले को लेकर दोनों देशों के उच्च अधिकारियों की संयुक्त बैठक बिहार के पटना में हो चुकी है। नेपाली अधिकारियों ने एक पत्र जारी कर भारत सरकार को धन्यवाद कहा है।

राप्ती नदी नेपाल से निकल कर भारतीय क्षेत्र श्रावस्ती में प्रवेश करती है। यह नदी भारत व नेपाल के सामरिक संबंधों का प्रतीक भी है, लेकिन यह दोनों देशों में तबाही भी मचाती है। कुछ वर्ष पूर्व भारत सरकार ने श्रावस्ती के जमुनहा क्षेत्र में कलकलवा-लक्ष्मनपुर तटबंध का निर्माण कर भारतीय क्षेत्र में तबाही को नियंत्रित करने का प्रयास किया था। इसका लाभ भारतीय लोगों को हो भी रहा है। हालांकि, नेपाल की ओर से यह आरोप लगाता रहा है कि कलकलवा में राप्ती को नियंत्रित करने से नेपाल के लो लैंड में नदी भारी तबाही मचाती है। कई गांव हर साल तबाह होते हैं। नेपाल ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाया। यहां तक कि नेपाल में हुए माओवादी आंदोलन के समय आंदोलनकारियों ने भारतीय क्षेत्र में बने इस तटबंध को गिराने का प्रयास भी किया था। लंबे समय तक चले इस विवाद को निपटाने के लिए भारत सरकार अब गंभीर हो चुकी है। इसी के तहत सरकार ने नेपाली क्षेत्र में भी राप्ती पर तटबंध निर्माण को लेकर सहमति दे दी है।

माना जा रहा है कि इससे नेपाल में होने वाली तबाही पर नियंत्रण लगेगा। यही नहीं भारत सरकार नेपाल में तटबंध निर्माण के लिए 10.5 अरब रुपये का सहयोग भी देगी। नेपाल सरकार को अपनी तरफ से एक अरब रुपये ही खर्च करने होंगे। बताया जा रहा है कि नेपाल में 35 किलोमीटर पक्के तो छह किलोमीटर मिट्टी के तटबंध का निर्माण होगा। इसके लिए कुछ दिन पूर्व ही बिहार के पटना में भारत के जल संसाधन नदी विकास व गंगा संरक्षण विभाग के अधिकारी व नेपाल के जल संसाधन एवं सिंचाई विभाग के मध्य अधिकारी बैठक कर चुके हैं। बैठक में मौजूद रहे नेपाल पीपुल्स एंबैंकमेंट प्रोग्राम फील्ड ऑफिस नंबर 6, लम्ही के प्रमुख जीत बहादुर थापा बताते हैं कि बैठक में भारत ने तटबंध को लेकर अपनी सहमति दे दी है। साथ ही भारत सरकार 10.5 अरब की मदद भी देगी। इस सहमति के अनुसार डीपीआर भी तैयार हो चुकी है। डीपीआर पर भी दोनों देशों की सहमति हो चुकी है। भारत सरकार का यह कदम नेपाल के लिए सुखद है। उन्होंने बताया, हम इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि तटबंध बनने के बाद नेपाल में जल प्लवन व कटान की समस्या नहीं होगी।

यह तटबंध नेपाल में होलिया के पास दुडुवा ग्रामीण नगर पालिका-1 से उत्तर-पश्चिम कचनापुर और उत्तर-पूर्व बिनौना तक) तक बनाने की योजना है। भारत-नेपाल की संयुक्त तकनीकी टीम इस पर काम करेगी। डीपीआर के अनुसार कहां और कैसे निर्माण होगा। इसका अध्ययन भी साइट पर ही जाकर किया जाएगा। यही नहीं इस बार बरसात में नेपाल का कौन सा क्षेत्र ज्यादा प्रभावित रहा है, इसका भी अध्ययन संयुक्त टीम करेगी।

नेपाल पीपुल्स एम्बैंकमेंट प्रोग्राम फील्ड ऑफिस के प्रमुख जीत बहादुर थापा का कहना है कि नेपाल मेें राप्ती नदी पर बनने वाले तटबंध के लिए बिहार के पटना में दोनों देशों के उच्चाधिकारियों की बैठक हो चुकी है। इसमें मैं भी मौजूद था। बैठक में सहमति बनी हैं कि नेपाल में 35 किलोमीटर लंबा ककरीट व छह किलोमीटर मिट्टी का तटबंध बनेगा। इसके लिए भारत सरकार 10.5 अरब रुपये का सहयोग देगी। यह पैसा किश्तों में मिलेगा। दीपावली के आसपास नेपाल इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया करेगा।

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