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ISRO ने 2023 के लिए तैयार की साइंस मिशन की रूपरेखा, सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में होगी प्रतिस्पर्धा

नई दिल्ली    (मानवीय सोच)  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  2023 में सूर्य के लिए आदित्य और चंद्रमा के लिए चंद्रयान-3 मिशनों के साथ वैज्ञानिक प्रयोगों पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। इसके साथ ही इसरो स्पेस एप्लीकेशन्स क्षेत्र में ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार है। अगले साल भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान परियोजना पर कई प्रयोग किए जाएंगे।

पहला मानवरहित मिशन होगा

साल 2023 की अंतिम तिमाही में यह पहला मानवरहित मिशन होगा। यह मानव-रेटेड लॉन्च विहिकल, ऑर्बिट मॉड्यूल प्रपल्शन सिस्टम और रिकवरी ऑपरेशन के प्रदर्शन को मान्य करने के मकसद से किया जाएगा। इसरो अगले साल की शुरुआत में कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से री-यूजेबल लॉन्च विहिकल का पहला रनवे लैंडिंग एक्सपेरीमेंट (RLV-LEX) करने की योजना बना रहा है। यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस महीने संसद को दी है। 

भारत में निजी कंपनियां तेजी से बढ़ रहीं आगे 

भारतीय स्टार्ट-अप्स ने पहली निजी क्षेत्र की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-एस रॉकेट से सब-ऑर्बिटल फ्लाइट (उप-कक्षीय उड़ान) के साथ अपनी दस्तक दे दी है। अप्रैल में स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट पर पिक्ससेल के हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह शकुंतला का प्रक्षेपण और इसरो के पीएसएलवी में का नवंबर में प्रक्षेपण किया गया था। स्काईरूट एयरोस्पेस ने नवंबर में भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट लॉन्च किया था। इसकी योजना अगले साल कक्षा में एक क्लाइंट सैटेलाइट को स्थापित करने की है, जबकि आईआईटी-मद्रास परिसर में एक स्टार्ट-अप, अग्निकुल कॉस्मॉस ने भी अत्यधिक अनुकूलन योग्य अग्निबाण रॉकेट से अपनी परीक्षण उड़ान की योजना बनाई है। 

दुनियाभर में कई कंपनियों में शुरू होगी प्रतिस्पर्धा 

पिक्सेल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवैस अहमद ने कहा कि हम छह कॉमर्शियल हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजरी उपग्रह विकसित कर रहे हैं, जो अगले साल प्रक्षेपण के लिए तैयार होंगे।

उन्होंने आगे कहा, “दुनिया भर में कई और रॉकेट कंपनियां अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च को सफल होते हुए देखेंगी। इससे रॉकेट-थीम वाले गेम ऑफ थ्रोन्स को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि वे अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने वाले ग्राहकों के एक ही सेट के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”

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